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At the Feet of The Mother

संपूर्ण समर्पण (a bhajan in Hindi)

लेखक: आलोक पांडे गायिका : ज्योतिका

माँ अब बस डूब जाऊँ मैं तुममें
खो दूँ मैं सारी ही पहचान तुममें l

ना मैं ही रहूँ ना ये संसार सारा
सभी में मैं देखूँ तेरा ही नजारा
जहाँ भी मैं देखूँ तुम्हें ही मैं देखू
तुम्हारे सिवा और कुछ भी ना देखूँ l

सांसे मेरी बस तेरी जिंदगी हो
मेरी धड़कनें तेरी ही रागिनी हो
रक्त की बूँदें सारी हो तुझपर समर्पित
हरेक कोशिका तेरी ही वंदिनी हो l

हृदय में मेरे प्रेम तेरा ही पनपे
जहां भाव जायें तेरा प्रेम जन्मे
मेरे सब विचारों में तू ही तू चमके
वाणी में माँ बस तेरा रस ही बरसे l

बस इतनी अरज माँ मेरी मान लेना
रहूँ मैं कहीं भी ना तुम दूर होना
भटकू यदि तो भी तुम साथ रहना
गिरूं मैं अगर तो माँ तुम थाम लेना l

लूँ कितने जनम कितने ही बार मृत्यु
मगर दोनों में तेरा ही बस दरस हो
हरेक देह में बस करूँ तेरी सेवा
तेरा प्रेम ही मेरे जीवन का रस हो l

ना कुछ चाहिये ना ही कुछ और मांगूं
सदा सर्वदा बस तुम्हें ही मैं चाहूँ l

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It is not the personality, the character that is of the first importance in rebirth — it is the psychic being who stands behind the evolution of the nature and evolves with it.