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At the Feet of The Mother

SAVITRI Book Four. Canto One (Eng-Hindi)

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BOOK FOUR. THE BOOK OF BIRTH AND QUEST

Canto One. The Birth and Childhood of the Flame

 

A maenad of the cycles of desire
Around a Light she must not dare to touch,
Hastening towards a far-off unknown goal
Earth followed the endless journey of the Sun.

कामना के युग-चक्रों की एक नाचती मत्त भैरवी
एक दिव्य ज्योति के चहुं ओर जिसे वह छूने का साहस नहीं कर पाती,
यह पृथ्वी सूर्यदेव के पीछे अपनी अनन्त यात्रा करती,
एक दूर स्थित अज्ञात लक्ष्य कीओर शीघ्र गति से बढ़ती जाती।

A mind but half-awake in the swing of the void
On the bosom of Inconscience dreamed out life
And bore this finite world of thought and deed
Across the immobile trance of the Infinite.

एक अर्ध-जाग्रत् मन ने शून्यता के झूले में
आदि अचित् धरा की छाती पर जीवन का स्वप्न देखा,
और परम् चिरन्तन की अचल समाधि के उस पार से
विचार और कर्म के इस नाशवान् संसार को वहन कर ले आया।

A vast immutable silence with her ran:
Prisoner of speed upon a jewelled wheel,
She communed with the mystic heart in Space.

पृथ्वी के संग एक विशाल निर्विकारी नीरवता दौड़तीः
एक रत्नजड़ित चक्र पर चढ़ी वह गति की बन्दिनी,
दिशाकाश में मानों गुह्य-हृदय के साथ संलाप करती।

Amid the ambiguous stillness of the stars
She moved towards some undisclosed event
And her rhythm measured the long whirl of Time.

इन तारों की संदिग्ध स्थिरता के मध्य
वह किसी गोपनीय घटना चक्र कीओर बढ़ी जा रही थी
और निज लयपूर्ण पद सेत्रिकालीय दीर्घ परिक्रमा को माप रही थी।

In ceaseless motion round the purple rim
Day after day sped by like coloured spokes,
And through a glamour of shifting hues of air
The seasons drew in linked significant dance
The symbol pageant of the changing year.

उस जामुनीवर्णी घेरे के चारोंओर अविराम गति से
रंगीन धारियों समान दिवस एक के बाद एक घूमते निकल गये,
और वायुमण्डल के बदलते रंगों की एक शोभा के मध्य
ऋतुएं एक दूसरे से बंधी एक महत्त्वपूर्ण नृत्य में
वर्ष परिवर्तन की प्रतीक उत्सवी यात्रा में खिंची चली आयीं।

Across the burning langour of the soil
Paced Summer with his pomp of violent noons
And stamped his tyranny of torrid light
And the blue seal of a great burnished sky.

इस धरती की तप्त क्लान्त शिथिलता के ऊपर
ग्रीष्म ऋतु अपनी भीषण दोपहरी भव्यता के साथ आयी,
और उसे अपनी उग्र प्रकाश की विभीषिका से मुद्रित कर गयी
और एक विशाल प्रज्वलित नभ की नीली मुद्रा लगा गयी।

Next through its fiery swoon or clotted knot
Rain-tide burst in upon torn wings of heat,
Startled with lightnings air’s unquiet drowse,
Lashed with life-giving streams the torpid soil,
Overcast with flare and sound and storm-winged dark
The star-defended doors of heaven’s dim sleep,
Or from the gold eye of her paramour
Covered with packed cloud-veils the earth’s brown face.[349]

फिर इसकी अग्निल अचेतावस्था या जमी हुई ग्रन्थि के मध्य
ताप से जीर्ण पंखों के ऊपर वर्षा का ज्वार टूट पड़ा,
वातावरण के अशान्त उनींदेपन को विद्युती कड़क से चौंका दिया,
और अलसायी धरती को जीवनदायी धाराओं से व्यथित कर दिया,
तूफान-पंखी काले मेघों की चमक और दमक से घिरी धरा को
तारे जैसे स्वर्ग की धूमिल निद्रा की पहरेदारी करते हों,
या उसे अपने प्रेमी के सुनहरे नेत्रों से बचाने को
पृथ्वी का गंदुमी वदन घने काले मेघ-पट ने ढक दिया हो।

Armies of revolution crossed the time-field,
The clouds’ unending march besieged the world,
Tempests’ pronunciamentos claimed the sky
And thunder drums announced the embattled gods.
A traveller from unquiet neighbouring seas
The dense-maned monsoon rode neighing through earth’s hours:
Thick now the emissary javelins:
Enormous lightnings split the horizon’s rim
And, hurled from the quarters as from contending camps,
Married heaven’s edges steep and bare and blind:
A surge and hiss and onset of huge rain,
The long straight sleet-drift, clamours of winged storm-charge,
Throngs of wind-faces, rushing of wind-feet
Hurrying swept through the prone afflicted plains:
Heaven’s waters trailed and dribbled through the drowned land.

सीमा की अवधि को पार करतीं विद्रोही सेनाओं सम,
मेघों का अन्तहीन प्रयाण संसार को घेरे था,
तूफानी घोषणाएं नभ पर अधिकार का डंका बजातीं
और विद्युती गर्जनाएं संघर्षरत देवों की सूचना के ढोल पीटतीं,
अशान्त पड़ोसी-सागरों से एक यात्री समान
घने-केशों सम वर्षाऋतु के मेघ गरजते पार्थिव घड़ियों में दौड़ते:
अब दूत के बरछोंसमान मेह-धार घनी हो गयी थी:
भीषण विद्युतीय गर्जनाएं दिगन्त को चीरे देतीं
और मानों प्रतिरोधी खेमों से वे एक-दूसरे पर फेंकी जातीं,
ये स्वर्ग के तटों को गहनता से जोड़ उन्हें अनावृत कर चकाचौंध कर देतीं:
अतिवृष्टि का आरम्भ एक जलप्रवाह और सरसराहट लेआया,
तूफानी हवाओं का घनघोर नाद,कीचड़-पानी का दीर्घ धारा सम बहना,
मरुत पुत्रों का जमघट, हवाई-चरणों की भागदौड़
नत-आहत मैदानों के मध्य से प्रचण्ड हवा तीव्र गति से बही जाती थी:
आकाश का जल इस डूबी हुई भूमि पर बरसता और उसे साथ खींचता।

Then all was a swift stride, a sibilant race,
Or all was tempest’s shout and water’s fall.

तब सब एक सत्वर तीव्र चाल, एक हंफाती दौड़ थी,
या सकल सृष्टि प्रचण्डताओं का चीत्कार और जल-प्लावन था।

A dimness sagged on the grey floor of day,
Its dingy sprawling length joined morn to eve,
Wallowing in sludge and shower it reached black dark.

दिवस की धूसर रंगी सतह पर एक धूमिलता झुक आयी,
जिसकी मलिनता ने फैलकर प्रभात को संध्या से जोड़ दिया,
कीचड़ और बौछार में लोटपोट होता यह काली रात बन गया

Day a half darkness wore as its dull dress.

दिवस एक आधे अन्धकार को अपनी धूमिल पोशाक सम पहने था।

Light looked into dawn’s tarnished glass and met
Its own face there, twin to a half-lit night’s:
Downpour and drip and seeping mist swayed all
And turned dry soil to bog and reeking mud:
Earth was a quagmire, heaven a dismal block.

प्रकाश ने उषा के मलिन दर्पण में देखा
और निज मुख को वहां अर्ध-ज्योतित रजनी के जुड़वां सम पाया:
मूसलधार और बूंदाबांदी और रिसती सीलन सबको व्यथित कर देती
और सूखी धरती को गंधाती कीचड़-कादों में बदल देतीः
नभ एक उदास पिण्ड था, धरती पंकिल हो गयी थी।

None saw through dank drenched weeks the dungeon sun.

इन भीगे सीलनभरे सप्ताहों में अन्धकूप में छिपे सूर्य को किसी ने न देखा।

Even when no turmoil vexed air’s sombre rest,
Or a faint ray glimmered through weeping clouds
As a sad smile gleams veiled by returning tears,
All promised brightness failed at once denied
Or, soon condemned, died like a brief-lived hope.

फिर भी जब वातावरण के उदास विश्राम को कोई विक्षोभ न छेड़ता,
तब उन रोते बादलों के मध्य एक क्षीण किरण ऐसे झिलमिला जाती
मानों गिरते अश्रुओं ने एक उदास स्मित की झलक पर पर्दा डाल दिया हो,
समस्त प्रत्याशी उज्ज्वलता निषेधित हो तुरन्त असफल हो छिप गयी हो
या, शीघ्र ही दोषी बन, एक क्षण-जीवी आशा सम मर गयी हो।

Then a last massive deluge thrashed dead mire
And a subsiding mutter left all still,
Or only the muddy creep of sinking floods
Or only a whisper and green toss of trees.[350]

तब एक अन्तिम घोर अतिवृष्टि ने मृत पंकिल धरा पर आघात किया
और एक कम होती गड़गड़ाहट ने समस्त को निःशब्द छोड़ दिया,
या केवल क्षीण होते जलप्लावन की पंकिलता का रेंगनामात्र बच रहा
या फिर वृक्षों का हरित आलोड़न और केवल फुसफुसाहट शेष था।

Earth’s mood now changed; she lay in lulled repose,
The hours went by with slow contented tread:
A wide and tranquil air remembered peace,
Earth was the comrade of a happy sun.

अब धरती की मन:स्थिति बदली; वह विश्रान्ति में नीरव लेटी थी,
धीमी सन्तुष्ट गति से घड़ियां बीत रही थीं:
एक उदार और शान्त परिवेश में शान्ति की स्मृति हो आती,
पृथ्वीदेवी अब एक प्रसन्न सूर्यदेवता की सहचरी थी।

A calmness neared as of the approach of God,
A light of musing trance lit soil and sky.
And an identity and ecstasy
Filled meditation’s solitary heart.

एक प्रशान्तता समीप आती लगी जैसे प्रभु का आगमन होने वाला हो,
समाधि-चिन्तन की ज्योति ने धरती आकाश को आलोकित कर दिया
और एक एकात्मता और आनन्द की मस्ती ने
ध्यानमग्नता के एकाकी हृदय को परिपूर्ण कर दिया।

A dream loitered in the dumb mind of Space,
Time opened its chambers of felicity,
An exaltation entered and a hope:
An inmost self looked up to a heavenlier height,
An inmost thought kindled a hidden flame
And the inner sight adored an unseen sun.

मनाकाश की मूकता में एक स्वप्न घूमने लगा,
उस अवधि ने निज आनन्द-कक्षों को उद़्घाटित कर दिया,
जिसमें एक आशा और उत्साह का प्रवेश हो गया:
एक अन्तर चैत्यपुरुष ने एक अलौकिक शिखर की ओर देखा,
एक अन्तर्तम संकल्प ने एक गोपित ज्योतिशिखा को प्रज्वलित कर दिया
और उस अन्तर दृष्टि ने एक अगोचर सूर्य की आराधना की।

Three thoughtful seasons passed with shining tread
And scanning one by one the pregnant hours
Watched for a flame that lurked in luminous depths,
The vigil of some mighty birth to come.

तीन विचारमग्ना ऋतुएं आलोकित चाल से बीत गयीं
और एक के बाद दूसरी गर्भायित घड़ियों का पर्यावलोकन करती गयीं,
वे एक आत्म-दीप्ति पर जो ज्योतिर्मय गर्भगहनता में छिपी थी, दृष्टि रखे थीं,
वे किसी भावी सामर्थ्यशाली जन्म के प्रति सचेत थीं।

Autumn led in the glory of her moons
And dreamed in the splendour of her lotus pools
And Winter and Dew-time laid their calm cool hands
On Nature’s bosom still in a half sleep
And deepened with hues of lax and mellow ease
The tranquil beauty of the waning year.

तब शरद्ऋतु अपनी चन्द्रकलाओं की शोभा साथ ले आ पहुंची
और अपने कमल सरोवरों की मोहिनी में खोयी सपनाती रही,
और तब हेमन्त और शिशिर ने अपने शान्त शीतल करों को
अभी तक उनींदी प्रकृति देवी के वक्ष पर धर दिया
और अपने रंगों से शिथिलता और मृदु विश्राम की आभा को
बीतते वर्ष की शान्त सौम्यता को और गहरा कर दिया।

Then Spring, an ardent lover, leaped through leaves
And caught the earth-bride in his eager clasp;
His advent was a fire of irised hues,
His arms were a circle of the arrival of joy.
His voice was a call to the Transcendent’s sphere
Whose secret touch upon our mortal lives
Keeps ever new the thrill that made the world,
Remoulds an ancient sweetness to new shapes
And guards intact unchanged by death and Time
The answer of our hearts to Nature’s charm
And keeps for ever new, yet still the same,
The throb that ever wakes to the old delight[351]
And beauty and rapture and the joy to live.

तब बसन्त ऋतु, एक गम्भीर प्रेमी, पल्लवों से कूद आ गया
और धरावधू को अपने व्यग्र आलिंगन में जकड़ लिया;
उसका अवतरण सतरंगी एक ज्वाला थी
उसकी भुजाएं हर्षोल्लास के आगमन का एक घेरा थीं
उसकीवाणी परात्परता के हित एक पुकार थी
जिसका गुह्य स्पर्श हमारे मर्त्य जीवनों की उस पुलकन को
जिससे यह जगत् रचा गया है सतत नवीनता प्रदान करता है,
एक पुरातन आदि माधुरी को नव-रूपों में गढ़ता है
और मृत्यु और काल से उसे अविकृत अक्षत सुरक्षित रखता है
प्रकृति देवी की मोहकता के प्रति हमारे हृदयों का उत्तर यही बसन्त है
जो सतत नवीन रहता है, तथापि सदा वही है,
यही स्पन्दन है जो पुरातन आदि-आनन्दरति हित सदैव जाग्रत् है
और सौन्दर्य और हर्षोल्लास और जीवन में सुख जगाता है।

His coming brought the magic and the spell,
At his touch life’s tired heart grew glad and young;
He made joy a willing prisoner in her breast.

बसन्त का आगमन अपना सम्मोहन और आकर्षण साथ लाया;
जिसके स्पर्श मात्र से जीवन का थकित हृदय प्रसन्न हो तरुणाई से भर गया;
उसने हर्ष को प्रकृति के अन्तर का इच्छुक बन्दी बना दिया।

His grasp was a young god’s upon earth’s limbs:
Changed by the passion of his divine outbreak
He made her body beautiful with his kiss.

धरा के अंगों को उसने एक तरुण देव समान धर लिया:
अपने दिव्य आवेशपूर्ण प्रादुर्भाव द्वारा परिवर्तित कर
उसने पृथ्वी की काया को निज चुम्बन से कान्तिमय बना दिया।

Impatient for felicity he came,
High-fluting with the coïl’s happy voice,
His peacock turban trailing on the trees;
His breath was a warm summons to delight,
The dense voluptuous azure was his gaze.

वह प्रभु के आनन्द के लिए अधीर हो यहां आया था,
कोयल के मधुर स्वर में वंशी की तान छेड़ता
अपनी मयूरपंखीपगड़ी को वृक्षों पर लहराता;
उसका श्वास समीर आह्लाद का एक स्नेहपूर्ण आमन्त्रण था,
उसकी घनी चितवन कामातुर नीलाकाश सम थी।

A soft celestial urge surprised the blood
Rich with the instinct of God’s sensuous joys;
Revealed in beauty, a cadence was abroad
Insistent on the rapture-thrill in life:
Immortal movements touched the fleeting hours.

एक मृदुल स्वर्गिक ललक रक्त को चौंका जाती
और उसे प्रभु के विलासी सुखों की प्रेरणा से भर देती;
जीवन में प्रहर्ष पुलकन का आग्रह करती
एक आरोह-अवरोही गति तरंग थी, जो सौन्दर्य में प्रकट हो उठी:
अमर गतियां इस क्षणिक समय को स्पर्श कर जातीं।

A godlike packed intensity of sense
Made it a passionate pleasure even to breathe;
All sights and voices wove a single charm.

एक देव-समान गहनता इन्द्रिय में भर गयी
कि श्वास लेना भी एक आवेशपूर्ण सुखानुभूति दे जाता;
सकल दृश्यों और ध्वनियों ने एक अद्वितीय इन्द्रजाल बुन डाला।

The life of the enchanted globe became
A storm of sweetness and of light and song,
A revel of colour and of ecstasy,
A hymn of rays, a litany of cries:
A strain of choral priestly music sang
And, swung on the swaying censer of the trees,
A sacrifice of perfume filled the hours.

इस मन्त्रमुग्ध गोल धरती के जीवन में जैसे
मधुरता और प्रकाश औ’ संगीत का एक तूफान आ गया,
हर्षोल्लास की, रंगों की एक मस्त बहार छा गयी,
रंगीन किरणों की एक कविता, अनेक ध्वनियों की एक स्तुति थी:
समवेत प्रार्थना का एक कीर्तन वहां गाया जाता
और, तरुवरों के झूमते पुष्प-धूपदानों पर झुलाया जाता,
सुगंध का एक समर्पण उन घड़ियों को गंध से भर देता।

Asocas burned in crimson spots of flame,
Pure like the breath of an unstained desire
White jasmines haunted the enamoured air,
Pale mango-blossoms fed the liquid voice
Of the love-maddened coïl, and the brown bee
Muttered in fragrance mid the honey-buds.

अशोक के पुष्प की रक्तवर्णी आभा दीपशिखा सम जलती,
एक अक्षत कामना की श्वास सम पावन
श्वेत मल्लिका की गंध समीर का पीछा कर उसे मोह लेती,
पीत हरित-मंजरियां प्रेम में मदमाती कोयल की
सरस कूक में मिठास घोल देतीं, और माटी-रंगी मधुमक्खी
मधु-भरी कलियों की सुगंधि के मध्य गुनगुनाती।

The sunlight was a great god’s golden smile.

एक महान् देवता की स्वर्ण मुस्कान सम धूप खिली थी।

All Nature was at beauty’s festival.[352]

सम्पूर्ण प्रकृति सौन्दर्य के मदनोत्सव में मग्न थी।

 

In this high signal moment of the gods
Answering earth’s yearning and her cry for bliss
A greatness from our other countries came.

देवताओं के इस महान् सांकेतिक मुहूर्त में
पृथ्वी की लालसा और आनन्द हित उसकी पुकार के उत्तर में,
अन्य लोकों से एक महत्ता यहां उतर आयी।

A silence in the noise of earthly things
Immutably revealed the secret Word,
A mightier influx filled the oblivious clay:
A lamp was lit, a sacred image made.

पार्थिव वस्तुओं के इस कोलाहल के मध्य, एक नीरवता ने
निर्विकार भाव से परम गुह्यशब्द प्रकटा दिया,
एक सामर्थ्यशाली प्रवाह ने इस धूमिल माटी को परिपूर्ण कर दिया:
एक प्रदीप जल उठा, एक पावन छवि की रचना हो गयी।

A mediating ray has touched the earth
Bridging the gulf between man’s mind and God’s;
Translating heaven into a human shape
Its brightness linked our transience to the Unknown.
A spirit of its celestial source aware
Descended into earth’s imperfect mould
And wept not fallen to mortality,
But looked on all with large and tranquil eyes.

एक अप्रत्यक्ष रश्मि ने आ इस धरती को स्पर्श किया
जिसने मानव मन और ईश्वर के मध्य की इस खाड़ी पर सेतु बांध दिया;
जिसकी ज्योति-दीप्ति ने हमारे अचित् को परम अज्ञेय से जोड़ दिया।
अपने दिव्य स्रोत के प्रति सचेत एक आत्मसत्ता
स्वर्ग को एक मानवाकृति में ढालती
धरा के इस अध-पके ढांचे में अवतरित हो गयी,
और मृत्यु लोक में पतित होकर भी नहीं रोयी,
वरन् निज शान्त और विशाल नयनों से इस सृष्टि कीओर निहारा।

One had returned from the transcendent planes
And bore anew the load of mortal breath,
Who had striven of old with our darkness and our pain;
She took again her divine unfinished task:
Survivor of death and the aeonic years,
Once more with her fathomless heart she fronted Time.

यह परात्पर लोकों से पुनः यहां लौट आयी थी
नश्वर श्वास का भार नये सिरे से उठाने,
पुराकाल में यह आत्मसत्ता हमारी अन्ध अविद्या और पीड़ा से संघर्षरत थी;
अब पुनः इसने अपना अपूर्ण दिव्य कार्यभार सम्भाल लिया:
युगों की अवधि और मृत्यु से अतिजीवित आत्म सत्ता
एक बार पुनः महाकाल का सामना निज अगाध हृदय से करने तत्पर थी।

Again there was renewed, again revealed
The ancient closeness by earth-vision veiled,
The secret contact broken off in Time,
A consanguinity of earth and heaven,
Between the human portion toiling here
And an as yet unborn and limitless Force.

अब फिर से नवजीवन दे, पुनः अभिव्यक्त कर दिया
उस आदि अभिन्नता को जो पार्थिव नेत्रों से छिपी थी,
काल में छिन्न-भिन्न हो गये उस गुप्त सम्पर्क को,
पृथ्वी और स्वर्ग की सहगोत्रिता को,
जो यहां पर श्रम में घिसटते उसके मानवीय अंश की
और अभी तक अजन्मी और असीम महाशक्ति के मध्य थी।

Again the mystic deep attempt began,
The daring wager of the cosmic game.

फिर से वह गुह्य गहन प्रयास आरम्भ हो गया,
ब्रह्माण्डीय लीला का दुस्साहसी दांव फिर लग गया।

For since upon this blind and whirling globe
Earth-plasm first quivered with the illumining mind
And life invaded the material sheath
Afflicting Inconscience with the need to feel,
Since in Infinity’s silence woke a word,
A Mother wisdom works in Nature’s breast
To pour delight on the heart of toil and want[353]
And press perfection on life’s stumbling powers,
Impose heaven-sentience on the obscure abyss
And make dumb Matter conscious of its God.

क्योंकि जब से इस अन्धे भ्रमते और चक्कर खाते भूमण्डल पर
पार्थिव जीव-द्रव्य तेजस्वी मन को साथ ले स्पन्दित हुआ,
और प्राण-जीवन ने इस जड़ता के खोल में प्रवेश कर
अचित् जड़ता को आक्रान्त कर संवेदनशीलबना दिया,
जब से अनन्तता की मूकता में एक शब्द जाग्रत् हो गया,
तब से प्रज्ञावती जगज्जननी विश्व-प्रकृति के अन्तर में कार्यरत है
कठिन श्रम और अभाव के अन्तर में आनन्द-रस उंडेलने के लिए,
यह जीवन के ठोकर खाते बलों पर पूर्णता प्राप्ति हित दबाव डालती है,
और इस अन्धे गर्त पर स्वर्गसम संवेदनशीलता आरोपित करने को
और मूढ़ जड़-तत्त्व को ईश-तत्त्व के प्रति सचेत करने के यत्न में लगी है।

Although our fallen minds forget to climb,
Although our human stuff resists or breaks,
She keeps her will that hopes to divinise clay;
Failure cannot repress, defeat o’erthrow;
Time cannot weary her nor the Void subdue,
The ages have not made her passion less;
No victory she admits of Death or Fate.

यद्यपि हमारी पतित मानसिकता आरोहण करना विस्मृत कर चुकी है,
और हमारा मानवीय तत्त्व विरोध करता या बिखर जाता है,
किन्तु वह इस माटी को दिव्य बनाने का निज संकल्प बनाये रखती है;
उसे असफलताएं दमित नहीं कर सकतीं, पराजय डिगा नहीं पाती है;
काल थका नहीं पाया और शून्य ब्रह्म शिथिल नहीं कर सका है,
युगान्तर भी उसके आवेश-उत्साह को न्यून नहीं कर पाये हैं;
मृत्यु या भाग्यविधाता की विजय को वह नहीं स्वीकारती।

Always she drives the souls to new attempt;
Always her magical infinitude
Forces to aspire the inert brute elements;
As one who has all infinity to waste,
She scatters the seed of the Eternal’s strength
On a half-animate and crumbling mould,
Plants heaven’s delight in the heart’s passionate mire,
Pours godhead’s seekings into a bare beast frame,
Hides immortality in a mask of death.

वह आत्मपुरुष को सदैव नव-प्रयास हित प्रेरित करती है;
जड़ पशु-तत्त्वों को माता की चमत्कारी अनन्तता
सतत अभीप्सा हित बाध्य करती है;
उसके समान जिसके पास लुटाने का अनन्त भण्डार भरा हो,
वह चिरन्तन शक्ति के बीजों को
एक अर्धचेतन और चकनाचूर होते गठन पर बिखेरती रहती है,
हृदय की आवेशी पंकिलता में दिव्यानन्द को रोप देती है,
देवत्व की खोजों को एक नग्न पशु-आकार में उंडेल देती है,
अमरता को मृत्यु के मुखौटे के पीछे छिपा रखती है।

Once more that Will put on an earthly shape.

एक बार पुन: उस सत्य-संकल्प ने एक पार्थिव रूप धर लिया।

A Mind empowered from Truth’s immutable seat
Was framed for vision and interpreting act
And instruments were sovereignly designed
To express divinity in terrestrial signs.

परम-सत्य की आदि पीठिका से शक्ति आहरण कर
एक सत्य-मानस को आत्म-दर्शन और प्रतिपादित कर्म हित गठित किया
और पार्थिव संकेतों में दिव्यता अभिव्यक्त करने को
यन्त्रों को प्रभुसत्ता के अनुरूप ढाल दिया।

Outlined by the pressure of this new descent
A lovelier body formed than earth had known.

इस नव-अवतरण द्वारा चाप पड़ने पर एक लावण्यमयी देह की
ऐसी रूप-रेखा आंकी, जैसी कि धरती ने इससे पहले देखी न थी।

As yet a prophecy only and a hint,
The glowing arc of a charmed unseen whole,
It came into the sky of mortal life
Bright like the crescent horn of a gold moon
Returning in a faint illumined eve.

पर फिर भी अभी तक यह भविष्यवाणी केवल एक संकेतमात्र थी,
एक अदृश्य सम्पूर्ण मोहिनी शोभा का एक चमकता अंश-मात्र थी,
मर्त्य-लोक के आकाश में यह दीप्ति
एक स्वर्ण-सुधाकर कीआंशिक कला सम ज्योतित
एक क्षीण होते सांध्य प्रकाश में पुनः उदित हो उठी।

At first glimmering like an unshaped idea
Passive she lay sheltered in wordless sleep,
Involved and drowned in Matter’s giant trance,
An infant heart of the deep-caved world-plan
In cradle of divine inconscience rocked[354]
By the universal ecstasy of the suns.

सर्वप्रथम एक अगठित विचार-भाव सम झिलमिलाती
निष्क्रिय वह निःशब्द निद्रा में सुरक्षित लेटी,
जड़-तत्त्व की विशाल समाधि में लीन और निमग्न थी,
विश्व-योजना रूपी एक गहन कन्दरा का शिशु-अन्तर-सी
वह दिव्य अचित् के पालने में
दिवाकरों की वैश्विक भाव-समाधि के आनन्द में झुलायी जाती।

Some missioned Power in the half-wakened frame
Nursed a transcendent birth’s dumb glorious seed
For which this vivid tenement was made.
But soon the link of soul with form grew sure;
Flooded was the dim cave with slow conscient light,
The seed grew into a delicate marvellous bud,
The bud disclosed a great and heavenly bloom.

अर्ध-जाग्रत् गठन की किसी संप्रेषित आदि शक्ति ने
एक परात्पर जन्म के मूक तेजस्वी बीज का पोषण किया
जिसके लिए इस जीवन्त ओजस्वी काया का सर्जन हुआ
किन्तु शीघ्र ही आत्मा और आकार के साथ सम्बन्ध यथार्थ हो गया;
काया की धूमिल कन्दरा धीमी चित्-ज्योति के प्रकाश से भर गयी,
वह बीज एक सुकोमल अद़्भुत कलिका बन गयी,
उस कली में एक महान् और अलौकिक अरुणिमा विकसित हो उठी।

At once she seemed to found a mightier race.

सहसा वह एक अधिक सामर्थ्यशाली जाति की आधारभूमि सम दिखने लगी।

Arrived upon the strange and dubious globe
The child remembering inly a far home
Lived guarded in her spirit’s luminous cell,
Alone mid men in her diviner kind.
Even in her childish movements could be felt
The nearness of a light still kept from earth,
Feelings that only eternity could share,
Thoughts natural and native to the gods.

इस विचित्र और अपरिचित भूमण्डल पर आकर
बालिका के अन्तर में एक सुदूर घर की स्मृति
उसकी चैत्यसत्ता के दीप्तिमय कक्ष में सुरक्षित रहती,
मानव समाज में एकाकी वह अपने दिव्यतर वर्ग में बसती
उसकी बालसुलभ गतिविधियां तक इस पृथ्वी से परे की थीं
उसमें एक ज्योति के सामीप्य की अनुभूति अभी भी थी,
ऐसी भावनाओं की, जो केवल शाश्वतता का अंश हो सकती थीं,
उसके विचारों में देवताओं की सहजता और स्वाभाविकता थी।

As needing nothing but its own rapt flight
Her nature dwelt in a strong separate air
Like a strange bird with large rich-colored breast
That sojourns on a secret fruited bough
Lost in the emerald glory of the woods
Or flies above divine unreachable tops.

उसे अपनी आत्म-तन्मयता को छोड़ कुछ नहीं चाहिये था
उसकी प्रकृति एक समर्थ एकाकी वातावरण में
एक विचित्र रंग-बिरंगी विहगी सम रहती
जो एक गुह्य फलों से लदी डाली पर विहार करती,
वनों की हरित पन्नगी शोभा में खोयी रहती
या दिव्य अगम्य शिखरों के ऊपर उड़ान भरती।

Harmoniously she impressed the earth with heaven.

अति सहजभाव से वह धरा पर स्वर्ग का प्रभाव मैत्रीभाव से उंडेलती।

Aligned to a swift rhythm of sheer delight
And singing to themselves her days went by;
Each minute was a throb of beauty’s heart,
The hours were tuned to a sweet-toned content
Which asked for nothing, but took all life gave
Sovereignly as her nature’s inborn right.

विशुद्ध आनन्द की एक द्रुत लय से एकसुर हो जाती
और उसकी मधुर तानों को गाते हुए उसके दिन बीतते गये;
प्रत्येक पल सौन्दर्य के हृदय की एक धड़कन था;
घड़ियां एक मधुर धुन की तुष्टि से पूर्ण एक-स्वर थीं
जो मांगती कुछ न थीं, किन्तु जीवन जो भी देता उसे ग्रहण करतीं
उसे अपने स्वाभाविक आत्म-अधिकार सम प्रभुता से लेतीं।

Near was her spirit to its parent Sun,
The Breath within to the eternal joy.

उसकी आत्मा अपने जनक सूर्यदेव के समीप थी,
अन्तर की दिव्य श्वास शाश्वत हर्ष की सहचरी थी।

The first fair life that breaks from Nature’s swoon,
Mounts in a line of rapture to the skies;
Absorbed in its own happy urge it lives,
Sufficient to itself, yet turned to all.[355]
It has no seen communion with its world,
No open converse with surrounding things.

जड़प्रकृति की मूर्छा भंग कर निकला प्रथम रम्य वनस्पति जीवन,
जो ऊर्ध्वाकाशों की ओर आह्लाद की एक पंक्ति में चढ़ा जाता;
अपने निजी आत्मप्रसाद की प्रेरणा में लीन यह जीता है,
स्वयं अपने में पर्याप्त, तथापि सबकीओर उन्मुख रहता है:
यह अपने जगत् के साथ कोई प्रकट सम्पर्क नहीं रखता,
चारों ओर की वस्तुओं से कोई प्रकट वार्तालाप नहीं करता।

There is a oneness native and occult
That needs no instruments and erects no form;
In unison it grows with all that is,
All contacts it assumes into its trance,
Laugh-tossed consents to the wind’s kiss and takes
Transmutingly the shocks of sun and breeze:
A blissful yearning riots in its leaves,
A magic passion trembles in its blooms,
Its boughs aspire in hushed felicity.

वहां एक नैसर्गिक और गुह्य एकात्मता होती है
जिसे किसी अवयवों की और आकार गढ़ने की आवश्यकता नहीं होती;
समस्त अभिव्यक्ति के साथ एकत्व में यह विकसित होती है।
यह निज समाधि में सकल सम्पर्कों को बनाये रखती,
हास्य बिखेरती पवन के चुम्बन को स्वीकारती
और फिर परिवर्तित रूप में सूर्य और वायु के थपेड़ों के आघात सह लेती:
इसके पत्तों में विविध रंगों की एक सुखदायी लालसा का विस्फोटन
और इसके पुष्पों में एक जादुई रागावेश कम्पित होता,
इसकी शाखाएं नीरव आनन्द में झूमती अभीप्सा-रत रहतीं।

An occult godhead of this beauty is cause,
The spirit and intimate guest of all this charm,
This sweetness’s priestess and this reverie’s muse.

इस सुषमा का कारण एक गुह्य देवांश है,
इस सकल शोभा की वह आत्मसत्ता और अतिप्रिय अतिथि होती,
वही इस माधुर्य की पुजारिन और इस कल्पना की देवी थी।

Invisibly protected from our sense
The Dryad lives drenched in a deeper ray
And feels another air of storms and calms
And quivers inwardly with mystic rain.

मानवीय इन्द्रिय बोध से अदृश्य भाव में सुरक्षित
वह दिव्या वनदेवी एक गहनतर रश्मि में निमग्न रहती
और तूफानी हवाओं और प्रशान्तताओं दोनों से सुखानुभूति पाती
और गुह्यवर्षा से उसका अन्तर स्पन्दित होता।

This at a heavenlier height was shown in her.

यह सब एक उच्चतर अलौकिकता उसमें दर्शाता था।

Even when she bent to meet earth’s intimacies
Her spirit kept the stature of the gods;
It stooped but was not lost in Matter’s reign.

तथापि जब भी वह पार्थिव घनिष्ठताओं को भेंटने झुकती
उसकी आत्मा देवताओं के स्तर को बनाये रखती;
यह झुकती किन्तु जड़तत्त्व के राज्य में नहीं खोती थी।

A world translated was her gleaming mind,
And marvel-mooned bright crowding fantasies
Fed with spiritual sustenance of dreams
The ideal goddess in her house of gold.

उसका तेजस्वी मानस एक अन्य जगत् का अनुवादी रूप था,
और अद़्भुत चन्द्रिका सम दीप्तिपूर्ण कल्पनाओं के समूह
स्वप्नों के आध्यात्मिक भोजन से पोषण देते
विज्ञानमयी देवी को उसके स्वर्णरचित भवन में।

Aware of forms to which our eyes are closed,
Conscious of nearnesses we cannot feel,
The Power within her shaped her moulding sense
In deeper figures than our surface types.

यह दिव्यता उन आकारों के प्रति भी सचेत थी जिन्हें हम देख नहीं पाते।
उन सान्निध्यों की ओर सचेत थी जिन्हें हम अनुभव नहीं करते,
उसकी आन्तरिक आदिशक्ति ने उसके इन्द्रिय गठन को
हमारे धरातलीय किस्म की अपेक्षा गहनतर रूपों में रूपायित किया था।

An invisible sunlight ran within her veins
And flooded her brain with heavenly brilliancies
That woke a wider sight than earth could know.

एक अदृश्य सूर्य-ज्योति उसकी शिराओं में दौड़ती
और उसके मस्तिष्क को स्वर्गिक प्रतिभाओं से आप्लावित कर देती
जिसने एक विशालतर दृष्टिकोण जगा दिया जो पृथ्वी पर अभी तक अज्ञात था।

Outlined in the sincerity of that ray
Her springing childlike thoughts were richly turned
Into luminous patterns of her soul’s deep truth,[356]
And from her eyes she cast another look
On all around her than man’s ignorant view.

उस किरण की सत्यशीलता में बाहरी रूप में रेखांकित
उसकी उछलती बालोचित विचारधारा समृद्धता से
आत्मा के गहन सत्य के उज्ज्वल आदर्शों में बदल जाती,
वह निज नयनों से चारोंओर जिस दृष्टि से देखती
वह मानव की अज्ञ चितवन से भिन्न, अत्युत्तम होती।

All objects were to her shapes of living selves
And she perceived a message from her kin
In each awakening touch of outward things.

उसके लिए सकल वस्तुएं जीवन्त तत्त्वों के रूप थे
और बहिर्वस्तुओं के प्रत्येक बोधकारी स्पर्श में
वह अपने आत्मीय का एक सन्देश पाती।

Each was a symbol power, a vivid flash
In the circuit of infinities half-known;
Nothing was alien or inanimate,
Nothing without its meaning or its call.

प्रत्येक शक्ति का एक प्रतीक,
अर्ध-ज्ञात अनन्तताओं की परिधि में एक विशुद्ध स्फुलिंग;
उसके लिए कुछ भी पराया या निष्प्राण नहीं था,
प्रयोजन-हीन और निरर्थक पुकार विहीन कुछ भी नहीं था।

For with a greater Nature she was one.

क्योंकि एक महत्तर परा-प्रकृति से सावित्री एकात्म थी।

As from the soil sprang glory of branch and flower,
As from the animal’s life rose thinking man,
A new epiphany appeared in her.

ज्यों भूमि से वनस्पति शाख और पुष्प उदित हुए थे
जैसे पशु-जीवन से मननशील मानव विकसित हुआ था,
वैसे ही उसके अन्तर में एक नवीन दैवी-प्रकाश प्रकटने लगा।

A mind of light, a life of rhythmic force,
A body instinct with hidden divinity
Prepared an image of the coming god;
And when the slow rhyme of the expanding years
And the rich murmurous swarm-work of the days
Had honey-packed her sense and filled her limbs,
Accomplishing the moon-orb of her grace,
Self-guarded in the silence of her strength
Her solitary greatness was not less.

एक ज्योतिर्मय मन, संगीतमय ओज से पूर्ण एक प्राण ने,
गोपित दिव्य सहजस्फुरण से पूर्ण एक देह ने
आगामी देवता की एक छवि तैयार कर बना दी;
और जब वर्धित होते वर्षों की मन्द समस्वरता ने
दिवसों की कार्य-बहुलता की सामूहिक समृद्ध गुनगुनाहट ने
उसके इन्द्रियबोध और अंगों को माधुर्य से भर दिया,
उसकी गरिमामयी चन्द्रकला को परिपूर्ण बना दिया,
उसकी शक्ति की नीरवता में आत्म-सुरक्षित
उसकी एकाकी महत्ता पहले की अपेक्षा घटी नहीं।

Nearer the godhead to the surface pressed,
A sun replacing childhood’s nebula
Sovereign in a blue and lonely sky.

ज्यों-ज्यों उसकी चैत्य सत्ता जीवन के धरातल पर उभरने लगी,
बचपन की नीहारिका के स्थान पर एक सूर्य
एकाकी नीलाकाश में एक अधिराट्सम उदित होने लगा।

Upward it rose to grasp the human scene:
The strong Inhabitant turned to watch her field,
A lovelier light assumed her spirit brow
And sweet and solemn grew her musing gaze;
Celestial-human deep warm slumbrous fires
Woke in the long fringed glory of her eyes
Like altar-burnings in a mysteried shrine.

यह मानवीय दृश्य को अधिकृत कर लेने को ऊर्ध्व में उठने लगा:
वह समर्थ अन्तर्यामी दिव्यता निज कर्म क्षेत्र के निरीक्षण हेतु घूमती।
उसके भाल पर अब एक सौम्यतर आत्म-ज्योति चमकती
और उसकी मनन करती दृष्टि गम्भीर और शान्त थी;
उसकी दिव्य मानवता की गहन तप्त शान्त अग्नियां
उसके नयनों की लम्बी पलकों की भव्यता में जाग्रत् हो गयीं
मानों एक रहस्यपूर्ण मन्दिर की वेदिका पर यज्ञाग्नि जलती हो।

Out of those crystal windows gleamed a will
That brought a large significance to life.

उन स्फटिक सम खिड़कियों से एक संकल्प कौंध जाता
यह जीवन को एक विशाल महत्त्व प्रदान कर देता।

Holding her forehead’s candid stainless space
Behind the student arch a noble power[357]
Of wisdom looked from light on transient things.

निज मस्तक के अक्षत पावन प्रदेश पर वह धारण किये थी
इस विद्यार्थी भाल के पीछे एक श्रेष्ठ अभिजात शक्ति प्रज्ञा की
जो इन नश्वर वस्तुओं को सत्य प्रकाश में अवलोकती।

A scout of victory in a vigil tower,
Her aspiration called high destiny down;
A silent warrior paced in her city of strength
Inviolate, guarding Truth’s diamond throne.

एक निरीक्षिका बुर्ज पर स्थित विजय के एक बालचर समान,
उसकी अभीप्सा ने उच्च नियति को नीचे बुला लिया;
उसकी शक्ति के नगर में एक मूक योद्धा चहलकदमी करता
परम-सत्य के हीरक-सिंहासन की रक्षा में तत्पर, यह परम-पुनीत था।

A nectarous haloed moon her passionate heart
Loved all and spoke no word and made no sign,
But kept her bosom’s rapturous secrecy
A blissful ardent moved and voiceless world.

उसके आवेशपूर्ण प्रेमी हृदय को सुधाकर का अमृत रस घेरे था
जो सबसे प्रेम करता और निःशब्द रह और कोई संकेत न देता,
किन्तु उसके अन्तर के भावपूर्ण आह्लाद को गोपित रखता
एक सुखानुभूति की गहन गति और मौन वाणीहीन जगत् था।

Proud, swift and joyful ran the wave of life
Within her like a stream in Paradise.

गरिमामयी, स्फूर्तिपूर्ण और हर्ष की यह प्राण-लहर
उसके अन्तर में स्वर्ग की एक धारा सम दौड़ती।

Many high gods dwelt in one beautiful home;
Yet was her nature’s orb a perfect whole,
Harmonious like a chant with many tones,
Immense and various like a universe.

उस एक रम्य भुवन में अनेक उच्च देवता बसते;
फिर भी उसके स्वभाव का वृत्त एक परिपूर्णता लिये रहता
अनेक सुरों के संगम से बना यह एक कीर्तन सम संगीतमय था,
विशाल और विविधताओं में एक विश्व-समान था।

The body that held this greatness seemed almost
An image made of heaven’s transparent light.

जो काया इस महानताको धारण किये थी
वह तो प्रायः स्वर्ग के पारदर्शी प्रकाश से रचित एक प्रतिमा सम थी।

Its charm recalled things seen in vision’s hours,
A golden bridge spanning a faery flood,
A moon-touched palm tree single by a lake
Companion of the wide and glimmering peace,
A murmur as of leaves in Paradise
Moving when feet of the Immortals pass,
A fiery halo over sleeping hills,
A strange and starry head alone in Night.[358]

इसकी मोहिनी आत्मदर्शन में देखी वस्तुओं का स्मरण करा देती,
एक घोर प्लावन के तटों को जोड़ते एक स्वर्ण-सेतु की,
एक सरोवर के तट पर एकाकी ज्योत्स्ना में स्नातताड़-तरुवर की
जो उस विस्तृत और जगमगाती शान्ति का सहचर बना खड़ा था,
स्वर्ग के पल्लवों की एक मरमरी ध्वनि की याद दिलाता
जो गुजरते देवताओं के गतिशील चरणों से आती,
निद्रामग्न पहाड़ियों के ऊपर एक ज्वलन्त आभामण्डल की
घोर रात्रि में एक विचित्र और एकाकी तारामण्डलकी।

END OF CANTO ONE