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At the Feet of The Mother

SAVITRI Book Four. Canto Two (Eng-Hindi)

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BOOK FOUR. THE BOOK OF BIRTH AND QUEST

Canto Two. The Growth of the Flame

 

A land of mountains and wide sun-beat plains
And giant rivers pacing to vast seas,
A field of creation and spiritual hush,
Silence swallowing life’s acts into the deeps,
Of thought’s transcendent climb and heavenward leap,
A brooding world of reverie and trance,
Filled with the mightiest works of God and man,
Where Nature seemed a dream of the Divine
And beauty and grace and grandeur had their home,
Harboured the childhood of the incarnate Flame.

पर्वतीय भूमि और विस्तृत धूप से भरे एक क्षेत्र में
जहां पर विशाल सरिताएं मन्थर गति से महासागरों कीओर बहती हैं,
सर्जनशीलता और आध्यात्मिक मौन की यह एक भूमि,
नीरवता जहां जीवन के कर्मों को निज गहनता में डुबो लेती,
संकल्प परात्परता पर आरोहण करते और स्वर्ग की ओर उछाल लेते,
दिवास्वप्न और आत्मसमाधि का एक चिन्तनशील संसार,
यह मानव और प्रभु की सर्वशक्तिशाली कृतियों से पूर्ण था,
जहां पर यह जड़ प्रकृति प्रभु के स्वप्न समान मनोहर दिखती,
जिसमें सौन्दर्य और शोभा और भव्यता बसती,
उस अवतारी दिव्यदीप्ति के बालपन की यही आश्रयस्थली थी।

Over her watched millennial influences
And the deep godheads of a grandiose past
Looked on her and saw the future’s godheads come
As if this magnet drew their powers unseen.

उसके ऊपर अनन्त युगों के प्रभावों की दृष्टि लगी थी
और एक भव्य अतीत की आत्मविभूतियां उसे देख रही थीं
और उन्होंने भावी दिव्यांशों के आगमन को देखा,
मानों उसकी चुम्बकीय शक्ति उनकी अदृश्य शक्तियों को खींचती हो।

Earth’s brooding wisdom spoke to her still breast;
Mounting from mind’s last peaks to mate with gods,
Making earth’s brilliant thoughts a springing-board
To dive into the cosmic vastnesses,
The knowledge of the thinker and the seer
Saw the unseen and thought the unthinkable,
Opened the enormous doors of the unknown,
Rent Man’s horizons into infinity.

भूदेवी की चिन्तनमग्ना प्रज्ञा उसके स्थिर नीरव अन्तर से बोलती;
वह मन के अन्तिम शिखरों से आरोहण कर देवों की सहचरी बन जाती,
पार्थिव श्रेष्ठ विचारों को वह एक कूदने का तख्ता बना कर
वैश्विक विशालताओं के अन्तर में डुबकी लगाती,
आत्ममनीषी और ऋषिद्रष्टा के ज्ञान ने
उसमें अगोचर का दर्शन पाया और अचिन्त्य का चिन्तन किया,
अज्ञेय के भीमाकारी द्वारों को उसने खोल कर,
मानव के क्षितिजों को चीर शाश्वतता में खोल दिया।

A shoreless sweep was lent to the mortal’s acts,
And art and beauty sprang from the human depths;
Nature and soul vied in nobility.

मर्त्य मानव-कर्मों को एक असीम विस्तार प्रदान कर दिया,
और मानवीय गहनताओं से कला और सौन्दर्य-रस बह निकला;
प्रकृति और पुरुष श्रेष्ठता हित स्पर्धा करते।

Ethics the human keyed to imitate heaven;
The harmony of a rich culture’s tones
Refined the sense and magnified its reach
To hear the unheard and glimpse the invisible
And taught the soul to soar beyond things known,
Inspiring life to greaten and break its bounds,[359]
Aspiring to the Immortal’s unseen world.

आचार-विचारों की संहिता स्वर्ग को अनुकरण करने की कुंजी बन गयी;
एक समृद्ध संस्कृति के स्वरों की सुसंगति ने
इन्द्रियबोध को परिष्कृत कर दिया और इसकी पहुंच को
अश्रुत को सुनने हित और अगोचर को देखने हित वर्धित कर दिया
और जीव को ज्ञात वस्तुओं से परे उड़ना सिखाया,
जीवन को महान बनने और अपने बन्धनों को भंग करने की प्रेरणा दी
और अमर देवों के अदृश्य जगत् हित अभीप्सा से भर दिया।

Leaving earth’s safety daring wings of Mind
Bore her above the trodden fields of thought
Crossing the mystic seas of the Beyond
To live on eagle heights near to the Sun.

पृथ्वी की सुरक्षा त्याग सत्यमन के साहसी पंख
सावित्री कोवहन कर उड़ जाते, साधारण विचारों के रूढ़िक्षेत्र के ऊर्ध्व में;
परात्पर ब्रह्म के गुह्य सागरों को पार कर वे
सत्य-सूर्य के समीप गरुड़-शिखरों पर रहने पहुंच जाते।

There wisdom sits on her eternal throne.

यहीं पर प्रज्ञा देवी निज शाश्वत सिंहासन पर आसीन है।

All her life’s turns led her to symbol doors
Admitting to secret Powers that were her kin;
Adept of truth, initiate of bliss,
A mystic acolyte trained in Nature’s school,
Aware of the marvel of created things
She laid the secrecies of her heart’s deep muse
Upon the altar of the Wonderful;
Her hours were ritual in a timeless fane;
Her acts became gestures of sacrifice.

अब उसके जीवन के सकल मोड़ उसे प्रतीक-द्वारों कीओर ले जाते
और उन महाशक्तियों को जो उसकी सजातीय थीं प्रवेश करा देते:
सत्य में निपुण, आनन्द की दीक्षिका,
परा-प्रकृति की पाठशाला में प्रशिक्षित एक गुह्य भैरवी,
सृष्ट पदार्थों के आद़्भुत्य के प्रति सचेत थी
वह निज हृदय के गहन चिन्तन के रहस्यों को
परम अद़्भुत-देव की वेदिका पर उत्सर्ग कर देती;
उसकी घड़ियां एक अकाल के मन्दिर का अनुष्ठान थीं;
उसके कर्म यज्ञ के संकेत बन गये।

Invested with a rhythm of higher spheres
The word was used as a hieratic means
For the release of the imprisoned spirit
Into communion with its comrade gods.

उच्चस्तरीय एक संगीत की लय से वह सज्जित थी
जिसमें शब्दों का एक याजकीय माध्यम सम प्रयोग
वह बन्दिनी जीव-सत्ता को मुक्ति दिलाने हित करती
तथा इसके सहयोगी देवों से इसका सम्पर्क करा देती।

Or it helped to beat out new expressive forms
Of that which labours in the heart of life,
Some immemorial Soul in men and things,
Seeker of the Unknown and the Unborn
Carrying a light from the Ineffable
To rend the veil of the last mysteries.

अथवा इससे नव-अभिव्यक्ति के आकारों को गढ़ने में सहायता लेती
जो अभी तक जीवन के अन्तर में व्यक्त होने को श्रमरत थे,
मनुष्यों और पदार्थों में व्याप्त कोई अविस्मरणीय परमसत्ता,
जो अज्ञात और अजात की खोजी थी
अनिर्वचनीय से एक प्रकाश वहन कर गतिशील बनी
इन अन्तिम गुह्यताओं का पट छिन्न-भिन्न करने में लगी थी।

Intense philosophies pointed earth to heaven
Or on foundations broad as cosmic Space
Upraised the earth-mind to superhuman heights.

गहन दर्शनशास्त्रों ने पृथ्वी को संकेत कर स्वर्ग दर्शाया
या ब्रह्माण्डीय दिशाओं सम विस्तृत आधारों पर उठा
इस पार्थिव मन को अति-मानव की उच्चताओं तक पहुंचा दिया।

Overpassing lines that please the outward eyes
But hide the sight of that which lives within
Sculpture and painting concentrated sense
Upon an inner vision’s motionless verge,
Revealed a figure of the invisible,
Unveiled all Nature’s meaning in a form,
Or caught into a body the Divine.

बाहरी नेत्रों को सुखदायी लगती सीमाओं को पार कर जाती
किन्तु वह अन्तर्वासी स्वयं अपनी दृष्टि से छिपा है
शिल्पकला और चित्रकला पर एकाग्र चित्तबोध में
सावित्री के एक अन्तर्दर्शन के स्थिर सीमा-तट पर,
उस अगोचर का एक रूप प्रकट हो उठा,
एक दर्शन में सकल विश्व-प्रकृति का अर्थ खुल गया,
या प्रभु को एक काया में धर लिया गया।

The architecture of the Infinite [360]
Discovered here its inward-musing shapes
Captured into wide breadths of soaring stone:
Music brought down celestial yearnings, song
Held the merged heart absorbed in rapturous depths,
Linking the human with the cosmic cry;
The world-interpreting movements of the dance
Moulded idea and mood to a rhythmic sway
And posture; crafts minute in subtle lines
Eternised a swift moment’s memory
Or showed in a carving’s sweep, a cup’s design
The underlying patterns of the unseen:
Poems in largeness cast like moving worlds
And metres surging with the ocean’s voice
Translated by grandeurs locked in Nature’s heart
But thrown now into a crowded glory of speech
The beauty and sublimity of her forms,
The passion of her moments and her moods
Lifting the human word near to the god’s.

चिरन्तनता की उस शिल्पकार ने
यहां इसके अन्तर्मुखी-चिन्तनमय रूपों का संधान किया
और उन्हें उन्नयनशील पाषाण की विस्तृत आकृतियों में धर लिया:
उसका संगीत स्वर्गिक लालसाओं को धरा पर उतार लाया,
गीत की आह्लादकारी गहनताओं में निमग्न हृदय खोया रहता,
जिसने मानवता को वैश्विक पुकार से जोड़ दिया;
उसके नृत्य की गतियां जगत् की व्याख्या करतीं
एवं भाव और भावना को एक लयात्मक संचालन और मुद्रा में ढाल देतीं;
सूक्ष्म रेखाओं के अति महीन शिल्पों में
एक क्षणिक क्षण की स्मृति का अमरत्व प्रदान कर
उसे एक नक्काशी की कूची से चषक पर उकेर देती
और अगोचर की अन्तर्निहित प्रतिकृतियों को दर्शा देती:
कविताएं उदारता से रची जातीं जैसे कि गतिशील लोक हों
और अन्तर-सागर से नाद सम छंद उभर आते
ये विश्व प्रकृति के अंतर में कैद वैभवों के अनुवाद थे
किंतु अब उसकी वाणी की परिपूर्ण महिमा से उद़्घोषित हो
उसकी रचनाओं में सौन्दर्य और उदात्तता से पूर्ण हो प्रकटे,
उसके मनोभावों और क्षणों के अनुरागी आवेश थे
जिसने मानवीय वाणी को उन्नत कर देवता के सान्निध्य में पहुंचा दिया।

Man’s eyes could look into the inner realms;
His scrutiny discovered number’s law
And organised the motions of the stars,
Mapped out the visible fashioning of the world,
Questioned the process of his thoughts or made
A theorised diagram of mind and life.

मानव की दृष्टि अब आन्तरिक स्तरों में अवलोक सकती थी;
उसके सूक्ष्म निरीक्षण ने संख्या का विधान संधान किया
और तारों की गतियों को निर्धारित किया,
इस पार्थिव लोक के दृश्य प्रतिमानों का मानचित्र आंक दिया,
वह निज विचारधारा की प्रक्रिया पर प्रश्न करता,
अथवा मन और प्राण का एक सैद्धान्तिक खाका स्थापित कर डालता।

These things she took in as her nature’s food,
But these alone could fill not her wide Self:
A human seeking limited by its gains,
To her they seemed the great and early steps
Hazardous of a young discovering spirit
Which saw not yet by its own native light;
It tapped the universe with testing knocks
Or stretched to find Truth-mind’s divining rod;
A growing out there was to numberless sides,
But not the widest seeing of the soul,
Not yet the vast direct immediate touch,
Nor yet the art and wisdom of the Gods.[361]

इन सबको वह अपने स्वाभाविक आहार सम ग्रहण करती,
किन्तु केवल इतने ही विषय उसकी विशाल विश्वात्मा को भरने को पर्याप्त नहीं थे:
एक मानवीय जिज्ञासा अपनी उपलब्धियों से सीमित हो जाती है,
उसको ये ज्ञान महान् और आरम्भिक चरण लगते थे
जो एक किशोर जिज्ञासु जीव के लिए साहसी एवं संकटपूर्ण थे
जिसने अभी तक अपनी आत्म-चेतना के सहज प्रकाश में नहीं देखा हो;
यह विश्व का परीक्षणों के प्रहारों से ठोक सम्पर्क स्थापित करता
या मानस की दिव्य शलाका को सत्य खोजने को फैला देता;
वहां पर अनगिनत कोणों से प्रगति करता एक विकास था,
किन्तु अन्तरात्मा की विशालता में अवलोकती आत्म-दृष्टि नहीं थी,
और अभी तक विशाल प्रत्यक्ष तात्कालिक स्पर्श भी वहां नहीं था,
और देवताओं की कला-मर्मज्ञता और प्रज्ञाबोध भी नहीं था।

A boundless knowledge greater than man’s thought,
A happiness too high for heart and sense
Locked in the world and yearning for release
She felt in her; waiting as yet for form,
It asked for objects around which to grow
And natures strong to bear without recoil
The splendour of her native royalty,
Her greatness and her sweetness and her bliss,
Her might to possess and her vast power to love:
Earth made a stepping-stone to conquer heaven,
The soul saw beyond heaven’s limiting boundaries,
Met a great light from the Unknowable
And dreamed of a transcendent action’s sphere.

मानवीय विचार से महत्तर एक मुक्त ज्ञान है,
हमारे हृदय और इन्द्रिय-बोध के लिए जिसे पाना अति दुष्कर है ऐसी एक प्रसन्नता
इस संसार के अन्तर में कैद है और जो मुक्ति हित लालायित है
इसकी अनुभूति उसने निज अन्तर में पायी; जो रूपायित होने की प्रतीक्षा में
उन वस्तुओं को मांगती जिनके चहुं ओर यह विकसित हो वर्धित हो सके
और उन दृढ़ स्वभावों की कामना करती जो बिना जुगुप्सा वहन कर सके
उसकी जन्मजात प्रभु-सम्पन्नता की शोभा को,
सावित्री की महानता और उसकी माधुरी और उसके प्रेमानन्द को,
उसकी अधिकृत कर लेने की सामर्थ्य और प्रेम करने के महान्बल को:
अब स्वर्ग को विजित करने को यह पृथ्वी एक आधारशिला बन गयी।
उसकी जीव-सत्ता ने स्वर्ग की सीमित सीमाओं के परे देखा,
परम-अज्ञेय से उतरती एक महती ज्योति से भेंट की
और एक परात्पर कर्मक्षेत्र का स्वप्न देखने लगी।

Aware of the universal Self in all
She turned to living hearts and human forms;
Her soul’s reflections, complements, counterparts,
The close outlying portions of her being
Divided from her by walls of body and mind
Yet to her spirit bound by ties divine.

समस्त सृष्टि में स्थित विश्वात्मा के प्रति सचेत हो
अब वह प्राणियों के हृदयों और मानवाकारों की ओर घूम गयी,
जो उसकी अपनी जीवात्मा की प्रतिच्छाया,पूर्तियां, प्रतिरूप थे,
उसकी अपनी सत्ता के ही अभिन्न बहिरंश थे
जो केवल काया और मानस की दीवारों द्वारा उससे पृथक् थे
तथापि दिव्य सूत्रों द्वारा वे उसकी आत्मा से बंधे थे।

Overcoming invisible hedge and masked defence
And the loneliness that separates soul from soul,
She wished to make all one immense embrace
That she might house in it all living things
Raised into a splendid point of seeing light
Out of division’s dense inconscient cleft,
And make them one with God and world and her.

अदृश्य सीमा रेखा और छद्मवेशी सुरक्षा को पार कर
और जीव को जीव से विलग करते एकाकीपन को जीत कर,
सावित्री ने समस्त को निज विशाल आलिंगन में ले एक कर देने की इच्छा की
जिससे अन्तर में वह सकल जीवित वस्तुओं को बसा ले
उन्हें प्रकाशमय दृष्टि से एक भव्य बिन्दु तक उठा दे
और विभाजनकारी जड़ अचित् के फाटन से बाहर निकाल ले,
और उन्हें प्रभु के साथ और जगत् एवं अपने संग एकात्म कर दे।

Only a few responded to her call:
Still fewer felt the screened divinity
And strove to mate its godhead with their own,
Approaching with some kinship to her heights.

किन्तु केवल अल्पजनों ने उसके आवाहन का उत्तर दिया:
उनसे भी अल्पतर ने उसकी आच्छादित दिव्यता का अनुभव पाया
और उसके देवांश से अपने सत्पुरुष को एक करने का प्रयास किया,
उसकी श्रेष्ठत्ताओं के साथ कुछ अपनत्व का भाव लेकर आये।

Uplifted towards luminous secrecies
Or conscious of some splendour hidden above
They leaped to find her in a moment’s flash,
Glimpsing a light in a celestial vast,
But could not keep the vision and the power
And fell back to life’s dull ordinary tone.[362]

द्युतिमान गुह्यताओं कीओर उन्नत हो
अथवा ऊर्ध्व में आवृत किसी भव्य शोभा के प्रति सचेत हो
वे एक क्षणिक विद्युती कौंधन में उसे खोजने कूद पड़े थे,
एक अलौकिक विस्तार में एक ज्योति की झलक पा ली,
किन्तु उस दिव्य दर्शन और उस शक्ति को रख नहीं सके
और जीवन की मन्द साधारण लय में वेपुन: खो गये।

A mind daring heavenly experiment,
Growing towards some largeness they felt near,
Testing the unknown’s bound with eager touch
They still were prisoned by their human grain:
They could not keep up with her tireless step;
Too small and eager for her large-paced will,
Too narrow to look with the unborn Infinite’s gaze
Their nature weary grew of things too great.

मानस जो स्वर्गिक परीक्षण करने का दुःसाहस करते,
उस महानता कीओर बढ़ते जिसकी समीपता की अनुभूति वे पाते,
वे अज्ञात की सीमा को व्यग्र स्पर्श से परीक्षण करते
किन्तु फिर भी अपने मानवीय स्वभाव में बन्दी रहतेः
वे सावित्री के अथक चरणों के साथ चल न पाते;
उसके महान् विशाल संकल्प के लिए उनकी चाल धीमी और अस्थिर थी,
अजात चिरन्तन को देखने को उनकी दृष्टि अति सीमित थी,
उनकी प्रकृति अति महती वस्तुओं से थकित हो व्यग्र हो उठती।

For even the close partners of her thoughts
Who could have walked the nearest to her ray,
Worshipped the power and light they felt in her
But could not match the measure of her soul.

क्योंकि उसके मन के समीप सहयोगी भी
जो उस रश्मि के अति समीप विचरण कर सकते थे,
वे उसकी अन्तर्शक्ति और आत्मज्योति की अनुभूति पा, उसे पूजते
किन्तु उसकी आत्मा की वे गहराई नहीं पाते थे।

A friend and yet too great wholly to know,
She walked in their front towards a greater light,
Their leader and queen over their hearts and souls,
One close to their bosoms, yet divine and far.

वह मित्र थी पर पूर्णत: जान लेने को अति महान् थी,
वह सदैव उनका नेतृत्व करती एक महत्तर प्रकाश की ओर बढ़ती,
वह उनके हृदयों की महिषी और आत्मा की पथप्रदर्शक थी,
उनके अन्तर के अति समीप होकर भी दिव्य और सुदूर थी।

Admiring and amazed they saw her stride
Attempting with a godlike rush and leap
Heights for their human stature too remote
Or with a slow great many-sided toil
Pushing towards aims they hardly could conceive;
Yet forced to be the satellites of her sun
They moved unable to forego her light,
Desiring they clutched at her with outstretched hands
Or followed stumbling in the paths she made.

प्रशंसा और आश्चर्य से भर वे उसकी चाल देखते
एक देवतुल्य शीघ्रता और उछाल से उसे
उन ऊंचाइयों कीओर कूदते देखते जो उनके मानवीय स्तर के लिए दुष्कर थीं
या एक मन्द धीर दीर्घ बहुविधाओं के परिश्रम से
उसे उन लक्ष्यों की ओर बढ़ते देखते, जिन्हें वे समझ भी नहीं पाते;
फिर भी उस सूर्य के उपग्रह बनने को वे बाध्य थे
वे उसके प्रकाश को त्यागने में असमर्थ, परिक्रमा करते रहते,
कामना से आतुर हाथ बढ़ा उसे पकड़े हुए चलते
या फिर उसके बनाये मार्ग पर लड़खड़ाते पगों से बढ़ते।

Or longing with their self of life and flesh
They clung to her for heart’s nourishment and support:
The rest they could not see in visible light;
Vaguely they bore her inner mightiness.

या देह और प्राण रचित निज व्यक्तित्व में लालसा से भरे
वे अपनी प्राण-पुष्टि हित और अवलम्बन के लिए उससे चिपके रहते;
इस प्रत्यक्ष प्रकाश में उसे पूर्णत: देख नहीं पाते थे;
उसकी अन्तरशक्ति को वे अनजाने वहन करते थे।

Or bound by the senses and the longing heart,
Adoring with a turbid human love,
They could not grasp the mighty spirit she was
Or change by closeness to be even as she.

या इन्द्रियों और लालायित हृदय से बंधे
एक पंकिल मानवीय प्रेम से उसे पूजते,
उस समर्थ आत्म-सत्ता को समझ नहीं पाते
या उसकी समीपता से परिवर्तित हो उसके समकक्ष नहीं बन पाते थे।

Some felt her with their souls and thrilled with her;
A greatness felt near yet beyond mind’s grasp;
To see her was a summons to adore,[363]
To be near her drew a high communion’s force.

कुछ अपनी अन्तरात्माओं में उसकी अनुभूति पा, आनन्दित होते,
एक महानता के सान्निध्य का अनुभव होता पर यह मन की पहुंच से परे था;
उसका दर्शन मात्र ही आराधना का एक आमंत्रण होता,
उसकी समीपता एक उच्च सहयोगिता की शक्ति को आकर्षित करती।

So men worship a god too great to know,
Too high, too vast to wear a limiting shape;
They feel a Presence and obey a might,
Adore a love whose rapture invades their breasts;
To a divine ardour quickening the heart-beats,
A law they follow greatening heart and life.

इसी प्रकार मनुष्य अज्ञेय महादेव की पूजा करते हैं,
जो एक सीमित रूप धारण करने को अति उन्नत अति विराट् है;
उसमें वे एक दिव्य उपस्थिति का अनुभव पाते और एक शक्ति का अनुसरण करते,
एक प्रेम को आराधते जिसके सुखानन्द से उनके अन्तर आक्रामित होते;
एक दिव्य प्रेमावेग उनकी हृदय-धड़कनों को तेज कर देता,
एक नियम-विधान को अनुसरते जो उनके प्राण और जीवन को महत्तर बना देता।

Opened to a breath is a new diviner air,
Opened to man is a freer, happier world:
He sees high steps climbing to Self and Light.

तब श्वास लेने को एक नव दिव्यतर वातावरण उद़्घाटित हो जाता,
मानव हित एक मुक्ति का सुखी प्रसन्नतर जगत् प्रकट हो उठा:
उसने परमात्म-तत्त्व और पराज्योति की ओर आरोहण हित उच्च सोपान देखा।

Her divine parts the soul’s allegiance called:
It saw, it felt, it knew the deity.

सावित्री के दिव्य अंशों ने उस अन्तरात्मा की भक्ति का आवाहन किया:
जिसने इसे देखा और इस अनुभव किया और इसकी दिव्यता को पहचान लिया।

Her will was puissant on their nature’s acts,
Her heart’s inexhaustible sweetness lured their hearts,
A being they loved whose bounds exceeded theirs;
Her measure they could not reach but bore her touch,
Answering with the flower’s answer to the sun
They gave themselves to her and asked no more.

उनके स्वाभाविक कर्मों पर सावित्री का संकल्प कार्य करता,
उसके हृदय का अक्षय माधुर्य उनके हृदयों को लुभाता,
उन्हें एक ऐसी सत्ता से प्यार था जो उनकी पहुंच से परे थी;
वे उसकी मर्यादा को नहीं पा सकते थे पर उसका स्पर्श उन्हें लभ्य था,
सूर्य के प्रति एक पुष्प सम उनका समर्पित निवेदन था
वे स्वयं को उसे सौंप देते और कुछ न चाहते।

One greater than themselves, too wide for their ken,
Their minds could not understand nor wholly know,
Their lives replied to hers, moved at her words:
They felt a godhead and obeyed a call,
Answered to her lead and did her work in the world;
Their lives, their natures moved compelled by hers
As if the truth of their own larger selves
Put on an aspect of divinity
To exalt them to a pitch beyond their earth’s.

वह उनके लिए अति महान्, उनके ज्ञान के लिए अति विशाल थी,
उनके मन उसे पूर्णत: समझ और पूरी तरह पहचान न पाये थे,
उनके जीवन उसके जीवन को प्रत्युत्तर देते और उसके शब्दों पर गतिशील होते:
उसमें देवत्व की अनुभूति पाते और एक पुकार का अनुसरण करते,
उसके नेतृत्त्व में चलते और संसार में उसके कार्यों की पूर्ति करते;
उनके जीवन, उनकी प्रकृतियां सब उससे बाध्य हो संचालित थीं
जैसे कि उनके स्वयं महत्तर व्यक्तित्वों के परम सत्य ने
दिव्यता का एक रूप धारण कर लिया हो
उन्हें निज पार्थिवता से परे की पराकाष्ठा में उठा देने को।

They felt a larger future meet their walk;
She held their hands, she chose for them their paths:
They were moved by her towards great unknown things,
Faith drew them and the joy to feel themselves hers;
They lived in her, they saw the world with her eyes.

वे अनुभव पाते अपनी जीवन यात्रा में एक महत्तर भविष्य को भेंटने का;
सावित्री ने उनके हाथों को थाम लिया, वही उनके पथों को चुनती:
वह उन्हें अज्ञात महान् पदार्थों कीओर संचालित करती,
उन्हें श्रद्धा और उसका बन जाने का हर्षमय अनुभव आकर्षित करता;
वे उसके अन्तर में बसते, उसके नयनों से इस संसार को देखते।

Some turned to her against their nature’s bent;
Divided between wonder and revolt,
Drawn by her charm and mastered by her will,
Possessed by her, her striving to possess,[364]
Impatient subjects, their tied longing hearts
Hugging the bonds close of which they most complained,
Murmured at a yoke they would have wept to lose,
The splendid yoke of her beauty and her love:
Others pursued her with life’s blind desires
And claiming all of her as their lonely own,
Hastened to engross her sweetness meant for all.

कुछ तो निज स्वाभाविक विरोध के लिए उसकी ओर मुड़ते;
वे विद्रोही भाव और आश्चर्य के मध्य विभाजित हो रहते,
उसकी मोहिनी द्वारा आकर्षित और संकल्प से शासित होते,
उससे ग्रस्त हो उसे अधिकार में लाने हित प्रयासरत रहते,
असन्तुष्ट प्रजाजन, अपने बन्दी लालायित हृदयों से
उन्हीं बन्धनों से चिपके रहते जिनके विरुद्ध वे सर्वाधिक शिकायत करते,
उसी जुए पर बड़बड़ाते जिसके हट जाने पर वे रोते,
यह भव्य जुआ उसके लावण्य और प्रेम का था:
कुछ अन्य थे जो जीवन को अन्धी कामनाओं से भर उसका पीछा करते
और उस पर सम्पूर्णता से केवल निज अधिकार जताते,
सर्वजन हिताय उसके माधुर्य को अधिकृत करने को तत्पर रहते।

As earth claims light for its lone separate need,
Demanding her for their sole jealous clasp
They asked from her movements bounded like their own
And to their smallness craved a like response.

ज्यों धरा प्रकाश पर केवल अपनी पृथक् आवश्यकता के लिए
एकाकी निज अधिकार मांगती हो वैसे ही वे उसे मात्र अपनी ईर्ष्यालु पकड़ में चाहते,
उसे अपनी गतियों को अपने समान बन्धन में बांध देने को कहते
और अपनी हीनता समान ही उसका प्रत्युत्तर चाहते।

Or they repined that she surpassed their grip,
And hoped to bind her close with longing’s cords.

या वे खीजते कि वह उनकी पकड़ से बाहर थी,
और आशा करते अपनी कामना के तन्तुओं के साथ उसे बांध लेने की।

Or finding her touch desired too strong to bear
They blamed her for a tyranny they loved,
Shrank into themselves as from too bright a sun,
Yet hankered for the splendour they refused.

या उसका स्पर्श जिसके लिए वे कामातुर थे सहन करना कठिन पाते
तब उसे अपनी अति प्रिय यातना के लिए दोषी ठहराते,
और जैसे कि तीव्र सूर्य के सामने हों ऐसे वे अपने में सिमट जाते,
स्वयं ही अस्वीकार कर पुनः उस भव्य शोभा के लिए ललचाते।

Angrily enamoured of her sweet passionate ray
The weakness of their earth could hardly bear,
They longed but cried out at the touch desired
Inapt to meet divinity so close,
Intolerant of a Force they could not house.

उसकी मधुर अनुरागी किरण से वे कुपित होकर भी मोहित थे,
जिसे उनकी पार्थिव दुर्बलता सह सकने में असमर्थ थी,
वे लालायित थे उसके स्पर्श के किन्तु उसे प्राप्त कर चीत्कार करते
दिव्यता का सान्निध्य सह पाने को अशक्य अयोग्य थे।
एक दिव्य तेज जिसे वे अन्तर में धर न पाये उसे सहने में अक्षम थे।

Some drawn unwillingly by her divine sway
Endured it like a sweet but alien spell,
Unable to mount to levels too sublime
They yearned to draw her down to their own earth.

उसके दिव्य प्रभाव से कुछ जन अनिच्छा से खिंच आते
और उसे एक मधुर किन्तु अपरिचित परकीय मोहपाश सम सहते;
अति दिव्यतर स्तरों तक आरोहण करने में असमर्थ
वे उसे अपने निज धरातल तक खींच लेने को लालायित रहते।

Or forced to centre round her their passionate lives
They hoped to bind to their heart’s human needs
Her glory and grace that had enslaved their souls.

या अपने आवेशी जीवनों को उसके चहुं ओर केन्द्रित करने को विवश हो जाते,
वे उसे अपने हृदयों की मानवीय आवश्यकताओं से बांध लेने कीआशा करते
उसकी महिमा और श्री शोभा को, जिसने उनके जीवों को दास बनाया था।

 

But mid this world, these hearts that answered her call,
None could stand up her equal and her mate.

किन्तु इस संसार के मध्य, जिन हृदयों ने उसके आवाहन का उत्तर दिया,
कोई भी उसका समकक्ष और सहचर बनने योग्य नहीं था।

In vain she stooped to equal them with her heights,
Too pure that air was for small souls to breathe.

व्यर्थ ही वह उन्हें अपनी उच्चता तक उठाने को नीचे झुकी थी,
इन लघु जीवों के श्वास हित उसका वातावरण अति निर्मल था।

These comrade selves to raise to her own wide breadths
Her heart desired and filled with her own power[365]
That a diviner Force might enter life,
A breath of Godhead greaten human time.

इन साथी व्यक्तित्वों को अपनी आत्म विशालताओं तक उठाने की
उसके प्राण ने उन्हें निज आत्म-शक्ति से भर देने की कामना की
जिससे एक दिव्यतर ऊर्जा धरा जीवन में प्रवेश कर जाये,
देवत्व का एक प्राणश्वास मानव-काल को महत्तर बना जाये।

Although she leaned down to their littleness
Covering their lives with her strong passionate hands
And knew by sympathy their needs and wants
And dived in the shallow wave-depths of their lives
And met and shared their heart-beats of grief and joy
And bent to heal their sorrow and their pride,
Lavishing the might that was hers on her lone peak
To lift to it their aspiration’s cry,
And though she drew their souls into her vast
And surrounded with the silence of her deeps
And held as the great Mother holds her own,
Only her earthly surface bore their charge
And mixed its fire with their mortality:
Her greater self lived sole, unclaimed, within.

यद्यपि सावित्री उनकी लघुता तक नीचे झुक आयी
उनके जीवनों को निज दृढ़ प्रेमी करों की छांह दी
और सहानुभूति द्वारा उनकी आवश्यकताओं और अभावों को जान गयी
और उनके जीवनों की उथली लहरों की गहराइयों में डूबी
और उनकी धड़कनों के दुःख-सुख में हिस्सेदार बन बैठी
और उनके शोक और अभिमान के घावों को भरने नमित हुई,
निज एकाकी उच्चता पर बसती अपनी शक्ति उसने उन पर लुटायी
जिससे वह उनमें अभीप्सा की पुकार पराकाष्ठा तक उठा सके,
और यद्यपि वह उनकी आत्माओं को अपने विस्तार में समा लेती
और अपनी गहनताओं की नीरवता से उन्हें चहुं ओर से घेर सुरक्षा देती
और महिमामयी जग-जननी सम निज अंक में अपनेपन से धारण करती,
किन्तु केवल उसकी सतही पार्थिवता उनका उत्तरदायित्व सम्भालती
और अपनी तेजस्विता की अग्नि उनकी नश्वरता के संग युक्त कर देती:
उसकी महत्तर आत्मसत्ता एकाकी, स्वाधिकार में, अन्तर-प्रतिष्ठित रहती।

Oftener in dumb Nature’s stir and peace
A nearness she could feel serenely one;
The Force in her drew earth’s subhuman broods;
And to her spirit’s large and free delight
She joined the ardent-hued magnificent lives
Of animal and bird and flower and tree.

प्रायः मूक पार्थिव प्रकृति के आन्दोलन और शान्ति में भी
वह प्रशान्त एकत्व की एक समीपता की अनुभूति पाती;
उसके अन्तर का आत्मतेज धरती की अवमानवीय सन्तानों को खींचता;
और निज चैत्यसत्ता के विशाल और मुक्तानन्द में
वह पशु और पक्षी और पुष्प एवं तरुवर के
विविधरंगी उमंगपूर्ण भव्य जीवनों से जुड़ जाती।

They answered to her with the simple heart.

वे उसे निज सरल हृदय से उत्तर देते।

In man a dim disturbing somewhat lives;
It knows but turns away from divine Light
Preferring the dark ignorance of the fall.

मानव में एक धूमिल अशान्त कुछ रहता है;
जो जानता हुआ भी दिव्य प्रकाश से मुख मोड़ लेता है
यह पतन की अन्धी अविद्या का वरण करता है।

Among the many who came drawn to her
Nowhere she found her partner of high tasks,
The comrade of her soul, her other self
Who was made with her, like God and Nature, one.

उन अनेकों में जो उससे आकर्षित हो समीप आते
उसने अपने महान् कार्य का सहचर कहीं नहीं पाया,
अपनी आत्मा का सहयोगी, उसकी सत्ता का युगल जोड़ा
जो उसी के लिए रचा गया था, पुरुष और प्रकृति सम, एक था।

Some near approached, were touched, caught fire, then failed.

कुछ पास आते, स्पर्श पाते, प्रज्वलित होते फिर असफल हो जाते।

Too great was her demand, too pure her force.
Thus lighting earth around her like a sun,
Yet in her inmost sky an orb aloof,
A distance severed her from those most close.

उसकी अपेक्षा अति महान् थी, उसकी तेजस्विता अति विशुद्ध थी
एक सूर्य सम उसने धरा को चहुं ओर ज्योति से भर दिया,
तथापि अपने अन्तरतम व्योम में एक एकाकी आभा-मण्डल,
अति समीप के निज प्रियजनों से उसे एक दूरी पृथक् करती थी।

Puissant, apart her soul as the gods live.[366]

प्रतिभाशाली देवोपम उसकी आत्मा एकाकी थी।

 

As yet unlinked with the broad human scene,
In a small circle of young eager hearts,
Her being’s early school and closed domain,
Apprentice in the business of earth-life,
She schooled her heavenly strain to bear its touch,
Content in her little garden of the gods
As blossoms a flower in an unvisited place.

वह अभी तक इस मानवीय दृश्य समाज से युक्त नहीं हो पायी थी,
तरुण उत्सुक आन्तरिक स्वजनों का एक लघु घेरा,
उसके व्यक्तित्व की आरम्भिक पाठशाला और सुरक्षित क्षेत्र था,
पार्थिव जीवन की प्रथम व्यावहारिकता में उस शिक्षार्थी ने,
अपने स्वाभाविक स्वर्गिक ढंग को संसारी स्पर्श सहना सिखाया,
एक निर्जन स्थान पर जैसे एक पुष्प प्रस्फुटित होता है
अपने छोटे-से नन्दन कानन में वह सन्तुष्ट रहती।

The wide world know not yet the inhabitant flame,
Yet something deeply stirred and dimly knew;
There was a movement and a passionate call,
A rainbow dream, a hope of golden change;
Some secret wing of expectation beat,
A growing sense of something new and rare
And beautiful stole across the heart of Time.

पृथ्वी से पोषित, वह अभी तक इस अन्तर-वासी ज्वाला से परिचित नहीं थी
तथापि गहराई में कुछ हलचल थी और धूमिल-सी जानकारी थी;
वहां एक आन्दोलन और एक आवेशपूर्ण पुकार थी,-
एक इन्द्रधनुषी स्वप्न, स्वर्णिम परिवर्तन की एक आशा;
प्रत्याशा का कोई गुप्त पंख फड़फड़ाया,
त्रिकाल के अन्तर को चुपके से पार कर किसी विरली नूतनता
और सौन्दर्य का एक वर्धित होता बोध चोरी से प्रवेश कर गया।

Then a faint whisper of her touched the soil,
Breathed like a hidden need the soul divines;
The eye of the great world discovered her,
A wonder lifted up its bardic voice.

तब उसके विषय में एक मन्द फुसफुसाहट ने धरा को छू लिया,
आत्मा ने एक गोपित आवश्यकता सम निश्वास खींच भावी को देखा;
महान् जगत् के नेत्रों ने उसे खोज लिया
और आद्भुत्य ने निज वाणी से चारण-वंदन किया।

A key to a Light still kept in being’s core,
The sun-word of an ancient mystery’s sense,
Her name ran murmuring on the lips of men
Exalted and sweet like an inspired verse
Struck from the epic lyre of rumour’s winds
Or sung like a chanted thought by the poet Fame.

सत्ता के अन्तस्तल में एक दिव्य ज्योति की कुंजी अभी तक सुरक्षित है,
एक सनातन पुरातन रहस्यबोध का यह सूर्य-मन्त्र है,
उसका नाम मानव के अधरों पर गुंजित हो जपा जाने लगा
यह एक अन्तर्जाग्रत् छंद समान मधुर और उदात्त था
जो या तो मरुतों की महाकाव्यी वीणा से झंकृत निकला था
या यशस्वी दिव्य कवि ने एक भावपूर्ण कीर्तन में इसे गाया था।

But like a sacred symbol’s was that cult.

किन्तु यह निष्ठा एक पावन प्रतीक सम निर्मल थी।

Admired, unsought, intangible to the grasp
Her beauty and flaming strength were seen afar
Like lightning playing with the fallen day,
A glory unapproachably divine.

श्रद्धा से पूर्ण, अयाचित, पहुंच से स्पर्शातीत
उसका लावण्य और तेजोमय शक्ति दूर से दिखायी देती
जैसे डूबते दिवस के साथ विद्युत् खिलवाड़ करती,
अगम्य दिव्यता का एक प्रभामण्डल थी।

No equal heart came close to join her heart,
No transient earthly love assailed her calm,
No hero passion had the strength to seize;
No eyes demanded her replying eyes.

उसके हृदय से जुड़ने कोई सादृश्य हृदय समीप न आया,
किसी क्षणिक पार्थिव प्रेम ने उसकी शान्ति को आक्रामित नहीं किया,
किसी धीर वीर के आवेश में उसे ग्रहण करने का साहस न था;
किसी के नयनों ने उसके नयनों से प्रत्युत्तर नहीं मांगा।

A Power within her awed the imperfect flesh;
The self-protecting genius in our clay
Divined the goddess in the woman’s shape[367]
And drew back from a touch beyond its kind,
The earth-nature bound in the sense-life’s narrow make.

उसका आत्मबल उनकी त्रुटिपूर्ण देह-सत्ता कोविस्मयाकुल कर देता;
हमारी माटी में बसती आत्म-संरक्षिका अन्तर्प्रतिभा ने
नारी रूप-धारिणी देवी को पहचान लिया था
और यह अपने वर्ग से बाहर के स्पर्श से पीछे हट गयी,
यह पार्थिव-प्रकृति इन्द्रिय-जीवन के सीमित ढांचे में बंधी है।

The hearts of men are amorous of clay-kin
And bear not spirits lone and high who bring
Fire-intimations from the deathless planes
Too vast for souls not born to mate with heaven.

मानव के अन्तर अपनी दैहिक माटी के सुहृद साथी के कामातुर प्रेमी हैं
और एकाकी उन्नत आत्माओं को सह नहीं पाते
जो अमर स्तरों से ज्वलन्त संदेशों को ले आती हैं,
वह उनके लिए अति विशाल होती हैं जो उनके सहचर होने को नहीं जन्मे।

Whoever is too great must lonely live,
Adored he walks in mighty solitude;
Vain is his labour to create his kind,
His only comrade is the Strength within.

अति महान् आत्मा का एकाकी जीना होता है।
पूजित होकर भी वह सामर्थ्यशाली एकान्त में विचरण करती है;
अपने वर्ग को रचने का उसका श्रम निष्फल होता है,
उसका अकेला सहचर उसका अन्तर का आत्मबल है।

Thus was it for a while with Savitri,
All worshipped marvellingly, none dared to claim.

कुछ समय के लिए सावित्री के संग भी ऐसा ही घटित हुआ।
सब आश्चर्य से भरे उसे पूजते, किन्तु अधिकृत करने का साहस न कर पाते।

Her mind sat high pouring its golden beams,
Her heart was a crowded temple of delight.

उसका मन उच्चासन पर आसीन निज स्वर्ण-रश्मियां बरसाता,
उसका हृदय आह्लाद से परिपूर्ण एक संकुलित मन्दिर था।

A single lamp lit in perfection’s house,
A bright pure image in a priestless shrine,
Midst those encircling lives her spirit dwelt,
Apart in herself until her hour of fate.[368]

परिपूर्णता के भवन में एक अद्वितीय अकेला दीप प्रज्वलित था
एक उज्ज्वल पावन प्रतिमा थी किन्तु वेदी का पुजारी नहीं था,
उन जीवनोंसे चहुं ओर से घिरी उसकी आत्मा रहती,
पृथक् निज-अन्तर में स्थित वह अपनी नियति की घड़ी की प्रतीक्षा में थी।

END OF CANTO TWO