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At the Feet of The Mother

SAVITRI Book Seven. Canto Three (Eng-Hindi)

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BOOK SEVEN. THE BOOK OF YOGA

Canto Three. The Entry into the Inner Countries

 

At first out of the busy hum of mind
As if from a loud thronged market into a cave
By an inward moment’s magic she had come,
A stark hushed emptiness became her self:
Her mind unvisited by the voice of thought
Stared at a void deep’s dumb infinity.

सर्वप्रथम सावित्री मन के व्यस्त गुंजन से बाहर निकली
मानों एक आन्तरिक चमत्कारी मुहूर्त द्वारा वह
एक बाजार की भीड़ भरे कोलाहल से दूर एक कन्दरा में आ पहुंची।
उसका चित्त नितान्त मूक रीता हो गयाः
विचार की वाणी उसके मन के द्वारे अब और नहीं आयी
जो एक रिक्त गर्त की मूक अनन्तता को घूर रहा था।

Her heights receded, her depths behind her closed;
All fled away from her and left her blank.

सावित्री की उच्चताएं दूर हो गयीं, उसकी गहनताएं पीछे छूट गयीं;
सब उससे पलायन कर उसे रीता छोड़ गयीं।

But when she came back to her self of thought,
Once more she was a human thing on earth,
A lump of Matter, a house of closed sight,
A mind compelled to think out ignorance,
A life-force pressed into a camp of works
And the material world her limiting field.

किन्तु अब वह पुनः अपनी विचार चेतना में लौट आयी,
एक बार फिर से इस धरती की मानवी बन गयी,
एक जड़तत्त्व से रचित पिण्ड, सीमित दृष्टि का एक भुवन हो गयी,
अविद्या में सोचने को बाध्य एक मन बन गयी,
कर्मों के एक खूंटे से बंधी दमित एक प्राण-ऊर्जा
जिसका सीमित कार्य-क्षेत्र यह भौतिक संसार था।

Amazed like one unknowing she sought her way
Out of the tangle of man’s ignorant past
That took the surface person for the soul.

एक अज्ञानी सम विस्मित हो उसने अपना पथ खोजा
मानव के अज्ञ अतीत की जटिलता से बाहर निकलने का
जिसने इस धरातली व्यक्तित्व को ही अपनी आत्मा समझा था।

Then a Voice spoke that dwelt on secret heights:
“For man thou seekst, not for thyself alone.

तब गुह्य पराकाष्ठाओं पर निवसती एक देव-वाचा सुनायी दीः
‘‘तू केवल अपने स्वार्थ हित संधान नहीं कर रही, वरन् यह समस्त मानवजाति हितार्थ है।

Only if God assumes the human mind
And puts on mortal ignorance for his cloak
And makes himself the Dwarf with triple stride,
Can he help man to grow into the God.

अतः यदि जब प्रभु भी मानव मन धारण करता है
और इस नश्वर अज्ञान को अपने दुशाले सम ओढ़ लेता है
और स्वयं को त्रिपदीय वामन रूप में बदल लेता है,
तब ही वह मानव को प्रभु की ओर विकसित होने में सहायता कर सकता है।

As man disguised the cosmic Greatness works
And finds the mystic inaccessible gate
And opens the Immortal’s golden door,
Man human follows in God’s human steps.

मानव के अन्तर में स्वयं को छिपा वह ब्रहाण्डीय मनीषी कार्य करता है
और गुह्य अगम्य द्वार खोज निकालता है
और अमरता के स्वर्ण द्वार खोल देता है
नर-मानव तब नारायण-मानव के पदचिह्नों का अनुसरण करता है।

Accepting his darkness thou must bring to him light,
Accepting his sorrow thou must bring to him bliss.

तूने मानव के अंधकार को स्वीकारा है तुझे उसके लिए प्रकाश लाना है,
उसके शोक-संताप को अंगीकार कर तुझे उसके लिए सुखानन्द लाना होगा।

In Matter’s body find thy heaven-born soul.”

जड़ता से रचित इस काया में तुझे अपनी स्वर्ग में जन्मी आत्मा खोजनी होगी।’’

Then Savitri surged out of her body’s wall[488]
And stood a little span outside herself
And looked into her subtle being’s depths
And in its heart as in a lotus-bud
Divined her secret and mysterious soul.

यह वाणी सुन सावित्री निज देह की दीवार से बाहर आ गयी
और स्वयं से कुछ दूर हटकर खड़ी हो गयी
और अपनी सूक्ष्म-सत्ता की गहनताओं के अन्तर में देखा
और निज हृदय में जैसे एक पद्मकली में हो
उसने अपनी गुह्य रहस्यपूर्ण चैत्यात्मा का अनुमान पाया।

At the dim portal of the inner life
That bars out from our depths the body’s mind
And all that lives but by the body’s breath,
She knocked and pressed against the ebony gate.

अन्तर प्राण के इस धूमिल प्रवेश द्वार को उसने खटखटाया,
जो हमारे भौतिक मन और उस सबको जो दैहिक श्वास पर
जीवित है, हमारी अन्तर गहनताओं से वर्जित रखता है
उस आबनूसी द्वार पर धक्का लगा दस्तक दी।

The living portal groaned with sullen hinge:
Heavily reluctant it complained inert
Against the tyranny of the spirit’s touch.

वह जीवित द्वार अपनी निष्क्रिय चूलों पर कराह उठाः
अकर्मण्य और अनिच्छुक तमस् से शिथिल बना
इसने आत्मस्पर्श की यातना के विरुद्ध उलाहना दिया।

A formidable voice cried from within:
“Back, creature of earth, lest tortured and torn thou die.”

तब अन्तर से एक भयंकरी दुर्जेय गिरा चीख उठीः
‘‘पीछे हट, ओ माटी के प्राणी, अन्यथा उत्पीड़ित और विनष्ट हो मर जायेगा।’’

A dreadful murmur rose like a dim sea;
The Serpent of the threshold hissing rose,
A fatal guardian hood with monstrous coils,
The hounds of darkness growled with jaws agape,
And trolls and gnomes and goblins scowled and stared
And wild beast roarings thrilled the blood with fear
And menace muttered in a dangerous tongue.

एक धूमिल सिंधु सम एक मन्द भयानक गर्जन नाद उठा;
उस देहलीज का कुण्डलित महानाग फुंकारता खड़ा था,
संरक्षण हित उसका घातक फण और विशाल भीषण कुण्डल था,
अन्ध तमस् के शिकारी श्वान जबड़ा फाडे़ गुर्रा रहे थे,
और बेताल और बौने शैतान और जिन्न त्योंरियां चढ़ाये घूर रहे थे
और वन्य पशु की दहाड़ों से रक्त भय से जमा जाता था
और विनाश का संकट एक खतरनाक बोली में बड़बड़ाता था।

Unshaken her will pressed on the rigid bars:
The gate swung wide with a protesting jar,
The opponent Powers withdrew their dreadful guard;
Her being entered into the inner worlds.

तथापि दृढ़वती उसके संकल्प ने उन कठिन सलाखों को दबायाः
वह द्वार एक विद्रोही कर्कश चरमराहट के साथ खुल गया,
उन विरोधी घोर शक्तियों ने अपना भयकारी पहरा उठा लिया;
सावित्री की सत्ता अपने अन्तर प्रदेशों में प्रवेश कर गयी।

In a narrow passage, the subconscient’s gate,
She breathed with difficulty and pain and strove
To find the inner self concealed in sense.

एक संकरी गली में, अवचेतन के मुख्य द्वार पर,
वह अति कठिनाई औ’ कष्ट से श्वास ले पाती थी,
पर वह इन्द्रिय बोध में गोपित आत्म-तत्त्व की खोज में लगी रही।

Into a dense of subtle Matter packed,
A cavity filled with a blind mass of power,
An opposition of misleading gleams,
A heavy barrier of unseeing sight,
She forced her way through body to the soul.

सूक्ष्म जड़तत्त्व की ठूंस-ठूंस भरी गयी एक घनता में,
एक अन्धी शक्ति के अम्बार से भरे एक विवर में,
भ्रम में डालती ज्योतियों के एक प्रतिरोध में,
अदृश्य अनदेखा करती दृष्टि की एक भारी बाधा में,
उसने इस देह के मध्य से आत्मा तक जाता निज पथ बलपूर्वक बनाया।

Across a perilous border line she passed
Where life dips into the subconscient dusk
Or struggles from Matter into chaos of mind,
Aswarm with elemental entities[489]
And fluttering shapes of vague half-bodied thought
And crude beginnings of incontinent force.

विपत्ति और संकट की एक सीमा पार कर वह पहुंच गयी जहां
प्राणशक्ति डूब जाती है घोर-अवचेतन के कुहरे की धूमिलता में
या जड़तत्त्व से संघर्ष करती मन की अन्ध व्यवस्था में खो जाती है,
जहां पर मूल सत्ताओं के दलों की भरमार है
और अर्ध-निर्मित विचार के अस्पष्ट मंडराते आकार हैं
और पाशविक असंयमी ऊर्जा की अनगढ़ आरम्भिक वृत्तियां हैं।

At first a difficult narrowness was there,
A press of uncertain powers and drifting wills;
For all was there but nothing in its place.

पहले तो वहां एक कठिन संकीर्णता का अस्तित्व था,
अनिश्चित शक्तियों और अस्थिर संकल्पों का एक दबाव था;
वहां पर सब कुछ था किन्तु कुछ भी अपने स्थान पर न था।

At times an opening came, a door was forced;
She crossed through spaces of a secret self
And trod in passages of inner Time.

यदा-कदा एक उद़्घाटन आ जाता, एक द्वार बलात् खुल जाता था;
एक गुह्य व्यक्तित्व की दिशाओं को उसने पार किया
और अन्तर दिक्काल की गलियों में विचरण किया।

At last she broke into a form of things,
A start of finiteness, a world of sense:
But all was still confused, nothing self-found.

अन्त में पदार्थों की एक आकृति में वह बलात् प्रवेश कर गयी,
यह मर्त्यता का एक आरम्भ था, इन्द्रिय-बोध का एक जगत् थाः
किन्तु अभी तक सब उलझा असंगत था, आत्मतत्त्व का अभाव था।

Soul was not there but only cries of life.

यहां आत्मा का अस्तित्व नहीं था केवल जीवन का कोलाहल था।

A thronged and clamorous air environed her.

एक भीड़भरे मुखर वातावरण ने उसे चहुं ओर से घेर लिया।

A horde of sounds defied significance,
A dissonant clash of cries and contrary calls;
A mob of visions broke across the sight,
A jostled sequence lacking sense and suite,
Feelings pushed through a packed and burdened heart,
Each forced its separate inconsequent way
But cared for nothing but its ego’s drive.

ध्वनियों का एक हंगामा महत्त्व और अर्थ को नकारता
चीत्कारों का एक बेसुरा टकराव और विरोधी द्वन्द्वों का संघर्ष था;
दृष्टि-पथ के सम्मुख दर्शनों का एक समूह टूट पड़ा;
घटनाक्रमों की एक रेलपेल थी जिसमें सार्थकता और संगति का अभाव था,
एक भारग्रस्त और बोझिल हृदय में भावनाएं धकेलतीं,
प्रत्येक अपना पृथक् असंगत मार्ग अपनाने को जोर देती
किन्तु अपने अहम् को छोड़ किसी अन्य की चिन्ता नहीं करती।

A rally without key of common will,
Thought stared at thought and pulled at the taut brain
As if to pluck the reason from its seat
And cast its corpse into life’s wayside drain;
So might forgotten lie in Nature’s mud
Abandoned the slain sentinel of the soul.

सामान्य संकल्प-विहीन एक साधारण जमघट था,
विचार को विचार घूरता और तनावभरे मस्तिष्क को खींचता
जैसे विवेक बुद्धि को अपने स्थान से च्युत करना चाहता हो
और इसके शव को जीवन-पथ की नाली में फेंकना चाहता हो;
जिससे यह आत्मा का निहत संतरी परित्यक्त बना
भूला बिसरा, अपरा प्रकृति के कीचड़ में पड़ा रहे।

So could life’s power shake from it mind’s rule,
Nature renounce the spirit’s government
And the bare elemental energies
Make of the sense a glory of boundless joy,
A splendour of ecstatic anarchy,
A revel mighty and mad of utter bliss.

जिससे प्राण जीवन अपने ऊपर से मन के शासन को हटा दे,
अपरा प्रकृति आत्मा के शासन का बहिष्कार कर दे
और ये नग्न आदि मूल-ऊर्जाएं
इन्द्रिय संवेदन को असीम सुख से गौरवान्वित कर दें,
चरम उन्मादी अराजकता की एक प्रदर्शनी सजा दें,
निपट ऐन्द्रिक सुखानुभूति की एक समर्थ और उन्मादी रंगोली बना दें।

This was the sense’s instinct void of soul
Or when the soul sleeps hidden void of power,
But now the vital godhead wakes within
And lifts the life with the supernal’s touch.[490]

आत्माहीन संवेदन की यही सहज प्रवृत्ति होती है
या जब शक्तिविहीन आत्मा अन्तर में छिपी सोती है,
किन्तु अभी तो प्राण देवत्व अन्तर में जाग्रत् है
और इसने जीवन को भगवत्ता का स्पर्श दे उन्नत कर दिया है।

But how shall come the glory and the flame
If mind is cast away into the abyss?

पर वह महिमा और अन्तर ज्वाला कैसे उद़्घाटित होगी
यदि मन की बुद्धि गर्त में छोड़ दी जायेगी?

For body without mind has not the light,
The rapture of spirit sense, the joy of life;
All then becomes subconscient, tenebrous,
Inconscience puts its seal on Nature’s page
Or else a mad disorder whirls the brain
Posting along a ravaged nature’s roads,
A chaos of disordered impulses
In which no light can come, no joy, no peace.

क्योंकि मन के विवेक के बिना यह काया प्रकाशविहीन है,
आत्म-बोध की भावसमाधि, जीवन के हर्ष से हीन है;
तब सब अवचेतना के घोर निरानन्दी अन्धेरे से घिर जाता है,
अचेतनता तब विश्व-प्रकृति के पृष्ठ पर अपनी मुहर लगा देती है
अन्यथा एक क्षत-विक्षत प्रकृति के मार्गों पर नियुक्त कर देती है
उस मस्तिष्क को जो एक उन्मादी अव्यवस्था के विलोड़न में भ्रमित है,
जीवन अनियमित आवेगों की एक अन्धेरगर्दी बन जाता है
जिसमें कोई प्रकाश, कोई हर्ष, कोई शान्ति प्रवेश नहीं कर सकती।

This state now threatened, this she pushed from her.

यही अवस्था अब संकट में डाल रही थी जिसे सावित्री ने अपने से परे धकेल दिया।

As if in a long endless tossing street
One driven mid a trampling hurrying crowd
Hour after hour she trod without release,
Holding by her will the senseless meute at bay;
Out of the dreadful press she dragged her will
And fixed her thought upon the saviour Name;
Then all grew still and empty; she was free.

मानों एक लम्बी अन्तहीन ऊंची-नीची गली में से कोई
उसे रौंदती धकियाती भीड़ के मध्य भगाये लिये जा रहा हो
घण्टों वह बिना विश्राम लिये चलती चली जाती हो,
वह अपने व्रती संकल्प से संवेदनहीन शिकारी कुत्तों को दूर रखे थी;
उस भीषण दबाव में से उसने अपनी इच्छाशक्ति को बाहर खींच निकाला
और अपने विचार को त्राता मन्त्र-नाम पर केन्द्रित कर दिया;
तब सब स्थिर शान्त और रिक्त हो गया; उसने मुक्ति का अनुभव पाया।

A large deliverance came, a vast calm space.

एक महान् विमुक्ति उसके अन्तर में आ बस गयी, उसका विशाल अन्तराकाश शान्त था।

Awhile she moved through a blank tranquillity
Of naked Light from an invisible sun,
A void that was a bodiless happiness,
A blissful vacuum of nameless peace.

कुछ देर वह एक अदृश्य सूर्य से आती नग्न आत्म प्रकाश की
एक शून्य प्रशान्ति के मध्य विचरण करती रही,
जो एक निराकारी आत्मप्रसादी शून्यता थी,
अनामी शान्ति की एक आनन्दपूर्ण रिक्तता थी।

But now a mightier danger’s front drew near:
The press of bodily mind, the Inconscient’s brood
Of aimless thought and will had fallen from her.

किन्तु अब एक घोर संकट का मुख समीप आने लगाः
यह शारीरिक मन का दबाव था, जड़ अचित् जगत् की सन्तानें थीं
यह लक्ष्यहीन विचार और संकल्प की थीं पर उन्हें वह मिटा चुकी थी।

Approaching loomed a giant head of Life
Ungoverned by mind or soul, subconscient, vast.

प्राणशक्ति का एक दैत्याकारी शीर्ष पास आता दिखायी दिया
यह मन या आत्मा द्वारा शासित नहीं था, अवचेतन एवं विशाल था।

It tossed all power into a single drive,
It made its power a might of dangerous seas.

इसने समस्त ऊर्जाओं को एक अकेले संचालन में उंडेल दिया,
इसने अपने बल को एक शक्तिशाली विपत्ति का सागर बना लिया।

Into the stillness of her silent self,
Into the whiteness of its muse of Space
A spate, a torrent of the speed of Life
Broke like a wind-lashed driven mob of waves
Racing on a pale floor of summer sand;
It drowned its banks, a mountain of climbing waves.[491]

सावित्री के अपने नीरव चित्त की स्थिरता में,
निज अपने आत्माकाश की समाधि की शुभ्रता में
एक बाढ़ का प्रवाह, प्राणशक्ति की एक वेगवती धारा टूट पड़ी
मानों एक तीव्र पवन द्वारा संचालित लहरों की उत्तेचित भीड़
ग्रीष्म बालू के एक पीले फर्श पर दौड़ रही हो;
जिसकी उमड़ती लहरों के एक पर्वत ने इसके तटों को डुबो दिया हो।

Enormous was its vast and passionate voice.

इसकी बृहद और आवेशपूर्ण ध्वनि अति विकराल थी।

It cried to her listening spirit as it ran,
Demanding God’s submission to chainless Force.

यह दौड़ती सावित्री की श्रोता अंतरात्मा पर चीख रही थी,
यह अपनी बंधनहीन घोर ऊर्जा के प्रति प्रभु का समर्पण मांग रही थी।

A deaf force calling to a status dumb,
A thousand voices in a muted Vast,
It claimed the heart’s support for its clutch at joy,
For its need to act the witness soul’s consent,
For its lust of power her neutral being’s seal.

एक बधिर ऊर्जा एक मूक प्रतिष्ठा की मांग कर रही थी,
एक गूंगी घोर विशाल शक्ति में सहस्त्र वाणियां थीं,
आनन्द को अपनी जकड़न में लेने के लिए इसने हृदय के समर्थन का दावा किया,
कार्य करने की अपनी आवश्यकता हेतु इसे साक्षी आत्मा की सहमति,
और निज अधिकार-लालसा की पूर्ति हेतु सावित्री की उदासीन सत्ता की मुहर मांगी।

Into the wideness of her watching self
It brought a grandiose gust of the Breath of Life;
Its torrent carried the world’s hopes and fears,
All life’s, all Nature’s dissatisfied hungry cry,
And the longing all eternity cannot fill:
It called to the mountain secrecies of the soul
And the miracle of the never-dying fire,
It spoke to some first inexpressible ecstasy
Hidden in the creative beat of Life;
Out of the nether unseen deeps it tore
Its lure and magic of disordered bliss,
Into earth-light poured its maze of tangled charm
And heady draught of Nature’s primitive joy
And the fire and mystery of forbidden delight
Drunk from the world-libido’s bottomless well,
And the honey-sweet poison-wine of lust and death,
But dreamed a vintage of glory of life’s gods,
And felt as celestial rapture’s golden sting.

सावित्री की द्रष्टा आत्मा के विस्तार में
यह महाप्राण के दिव्य श्वास का एक भव्य झोंका ले आयी थी;
अपने प्रबल प्रवाह में जगत् की आशाओं और भयों को वहन कर रही थी
सकल जीवन की, सम्पूर्ण अपरा प्रकृति की असन्तुष्ट पुकारें,
और समस्त शाश्वतता जिसे भर नहीं सकी ऐसी लालसाओं से भरी थीं।
इसने अन्तरात्मा की शिखर गुह्यताओं को बुलाया
और अमर-अग्नि के चमत्कार का आवाहन किया,
किसी प्रथम अव्यक्त प्रहर्ष से इसने संलाप किया
जो जीवन की रचनात्मक धड़कन में गोपित था;
अदृश्य पातालीय गर्तों से इसने खींच बाहर निकाल लिया
अपने अव्यवस्थित सुख के आकर्षण और जादू को,
पृथ्वी के भौतिक प्रकाश में इसने अपना जटिल मोहक जाल बिछा दिया
और पार्थिव प्रकृति को आदिम सुख की मदमाती सुरा का पान कराया
और निषेधित हर्ष का रहस्यमय अग्निल घूंट
संसार की अगाध काम-पिपासा के अतलकूप से पिलाया,
और मधु-सम मीठी भोग औ’ मृत्यु की विषैली शराब से मदमस्त कर दिया,
किन्तु जीवन के देवताओं की यशस्विनी सोम-सुधा का सपना दिखाया,
और स्वर्गिक प्रहर्ष की स्वर्णिम चुभन को अलौकिक सुख सम अनुभव कराया।

The cycles of the infinity of desire
And the mystique that made an unrealised world
Wider than the known and closer than the unknown
In which hunt for ever the hounds of mind and life,
Tempted a deep dissatisfied urge within
To long for the unfulfilled and ever far
And make this life upon a limiting earth
A climb towards summits vanishing in the void,
A search for the glory of the impossible.

कामना के अनन्त युगचक्रों और गुह्य सिद्धान्त ने
एक असिद्ध कल्पित जग को रच डाला है,
यह जगत् ज्ञात से बृहत्तर है और अज्ञात की अपेक्षा समीपतर है
जिसमें मन और प्राण के शिकारी कुत्ते सतत खोजा करते हैं,
इसने सावित्री के अन्तर की एक गहरी असन्तुष्ट प्रवृत्ति को ललचाया
सतत सुदूर स्थित और अपूर्ण पिपासा की लालसा से भरने को
और एक सीमित धरती पर इस जीवन को शून्यता की
विलोपित होती उच्चताओं की ओर आरोहण हित सोपान बना लेने को,
उस असम्भव की महिमा के लिए एक खोज बनने को।

It dreamed of that which never has been known,[492]
It grasped at that which never has been won,
It chased into an Elysian memory
The charms that flee from the heart’s soon lost delight;
It dared the force that slays, the joys that hurt,
The imaged shape of unaccomplished things
And the summons to a Circean transmuting dance
And passion’s tenancy of the courts of love
And the wild Beast’s ramp and romp with Beauty and Life.

यहां कभी जो ज्ञात न हो सका है इसने उसका सपना देखा,
इस प्राण ने उसे अधिकृत कर लिया जो यहां कभी अधिकार में नहीं आया है,
हृदय से शीघ्र उड़ खो जाते सुखों की मोहनियों का
इसने एक स्वर्गिक स्मृति-धाम तक पीछा किया;
वध करने वाले बल की चुनौती स्वीकारी, आहतकारी आमोदों को ललकारा,
अव्यक्त पदार्थों के आकार-रूप की कल्पना की
और एक मायावी तत्त्वान्तरणकारी नृत्य हित आवाहन किया
और रसिक दरबारों के आवेशपूर्ण पदाधिकार का निमन्त्रण पाया
और सौन्दर्य एवं प्राणिक जीवन को साथ ले जंगली पाशविक रासरंग मनाया।

It brought its cry and surge of opposite powers,
Its moments of the touch of luminous planes,
Its flame-ascensions and sky-pitched vast attempts,
Its fiery towers of dream built on the winds,
Its sinkings towards the darkness and the abyss,
Its honey of tenderness, its sharp wine of hate,
Its changes of sun and cloud, of laughter and tears,
Its bottomless danger pits and swallowing gulfs,
Its fear and joy and ecstasy and despair,
Its occult wizardries, its simple lines
And great communions and uplifting moves,
Its faith in heaven, its intercourse with hell.

यह प्राण अपने साथ विरोधी शक्तियों का चीत्कार और उफान लाया,
जो अपने द्युतिमान स्तरों के स्पर्श के कुछ पल दे जाता,
अपने प्रज्वलित आरोहणों और आकाश-पड़ावों हेतु विशाल प्रयास करता,
स्वप्न की अपनी ज्वलन्त मीनारें हवाओं पर निर्मित कर डालता,
अन्धकार और गर्त में अपने डूबने का अनुभव करता,
अपनी मधु सम कोमलता, अपनी घृणा की तीखी मदिरा पिला देता,
इसकी धूप और काले बादल की छाया का परिवर्तन, हास्य और रोदन के आंसू,
इसके अगाध संकटकारी-गर्त और निगलती खाड़ियां,
इसका भय और हर्ष औ’ आह्लादकारी सुख और निराशा,
इसकी मायावी करामातें, इसकी सहज सरल रेखाएं
और महान् आलाप-संलाप और उत्थानकारी गतियां,
स्वर्ग के प्रति अपनी आस्था, नरक के साथ अपने समागम ले आता।

These powers were not blunt with the dead weight of earth,
They gave ambrosia’s taste and poison’s sting.

धरा के बोझिल भार से इसकी ये शक्तियां कुन्द नहीं हुई थीं,
इनमें स्वर्गिक फल का स्वाद और विष-दंश की जलन थी।

There was an ardour in the gaze of Life
That saw heaven blue in the grey air of Night:
The impulses godward soared on passion’s wings.

इस अन्तर-प्राण की चितवन में एक उत्साह की भावना थी
यह घोर रजनी के काले परिवेश में स्वर्ग की नीलिमा देखताः
अन्तर-आवेश के पंख लगा अन्तर प्रेरणाएं देवत्व की ओर उड़तीं।

Mind’s quick-paced thoughts floated from their high necks
A glowing splendour as of an irised mane,
A parure of pure intuition’s light;
Its flame-foot gallop they could imitate:
Mind’s voices mimicked inspiration’s stress,
Its ictus of infallibility,
Its speed and lightning heaven-leap of the Gods.

विद्युतीय गति से मन के संकल्प अपने उच्च शिखरों से बहते आ जाते,
जैसे एक विविधरंगी अयाल की एक जगमगाती शोभा हो,
विशुद्ध अन्तर्ज्ञान के प्रकाश की एक रत्नमाला हो;
इसकी विद्युतीय चाल की वे नकल करतेः
मानसिक वाणियां अन्तर्ज्ञान के स्वराघात का स्वांग भरतीं,
इसकी अमोघता को प्रकाश में ले आतीं,
इसकी गति और स्वर्ग की ओर विद्युतीय उड़ान देवताओं की थी।

A trenchant blade that shore the nets of doubt,
Its sword of discernment seemed almost divine.

एक क्षिप्र धार की छुरी समान यह शंका के जालों को काट देता,
विवेक की इसकी तलवार दिव्यता लिये हुए थी।

Yet all that knowledge was a borrowed sun’s;
The forms that came were not heaven’s native births:[493]
Its puissance dangerous and absolute
Could mingle poison with the wine of God.

फिर भी यह सब ज्ञान एक उधार के सूर्य का प्रकाश था;
ये आकृतियां जो आतीं वे स्वर्ग में नहीं जन्मी थीं:
एक अन्तर्वाचा असत् का परम-शब्द उच्चार सकती है;
इसकी शक्ति निर्बाध और संकटपूर्ण है
यह प्रभु की मदिरा में विष घोल सकती है।

On these high shining backs falsehood could ride;
Truth lay with delight in error’s passionate arms
Gliding downstream in a blithe gilded barge:
She edged her ray with a magnificent lie.

इसके उन्नत दिखावटी बल पर मिथ्या-तत्त्व सवारी कर सकता है;
सत्य भी भूल-भ्रांति के साथ उसके आवेशी आलिंगन में बद्ध हो सकता है
एक प्रफुल्लित सुनहरी नौका में धाराप्रवाह नीचे बह सकता हैः
इस शक्ति ने अपनी किरण को एक भव्य मिथ्या की तीक्ष्ण धार बना दिया।

Here in Life’s nether realms all contraries meet;
Truth stares and does her works with bandaged eyes,
And Ignorance is Wisdom’s patron here.
Those galloping hooves in their enthusiast speed
Could bear to a dangerous intermediate zone
Where Death walks wearing a robe of deathless Life.

यहां इस प्राण लोक के निम्न राज्यों में सकल द्वन्द्वों का मिश्रण होता है;
सत्य देखता है पर अपना कार्य आंखों पर पट्टी बांध करता है
और घोर अविद्या यहां प्रज्ञा को संरक्षण देती हैः
सरपट दौड़ते प्राण अश्व अपनी उत्साही चाल की उतावली में
हमें एक विपत्तिदायी मध्य-क्षेत्र में ले जा सकते हैं
जहां पर चिर मृत्यु अमर जीवन का एक बाना धारण कर विचरती है।

Or they enter the valley of the wandering Gleam
Whence, captives or victims of the specious Ray,
Souls trapped in that region never can escape.

या वे उस भटकती ज्ञान-किरण की घाटी में प्रवेश कर जाते
जहां पर, उस सत्याभासी भ्रामक किरण के कैदी या शिकार हो जाते हैं,
उस क्षेत्र में फंसे जीव कभी बच कर नहीं निकल सकते हैं।

Agents, not masters, they serve Life’s desires
Toiling for ever in the snare of Time.

वे कामनाओं के स्वामी नहीं, दलाल हैं, उसकी सेवा में रत रहते हैं
काल की सीमा में फंसकर सतत श्रम में लगे रहते हैं।

Their bodies born out of some Nihil’s womb
Ensnare the spirit in the moment’s dreams,
Then perish vomiting the immortal soul
Out of Matter’s belly into the sink of Nought.

उनके शरीर किसी असत् निहिल से जनमते हैं
क्षणभर के सपनों में आत्मपुरुष को फंसा लेते हैं,
तब उस अमर आत्मा के जड़तत्त्व के उदर से
किसी घोर निर्वाण की कठौती में वमन कर विनाश को प्राप्त होते हैं।

Yet some uncaught, unslain can warily pass
Carrying Truth’s image in their sheltered heart,
Pluck Knowledge out of error’s screening grip,
Break paths through the blind walls of little self,
Then travel on to reach a greater life.

तथापि कुछ जीव नहीं फंसते और वे सुरक्षित सतर्क हो निकल जाते हैं
वे अपने हृदय की सुरक्षा में परम-सत्य की छवि ओट में वहन कर ले जाते हैं,
वे दोष-भ्रान्ति के पट के पीछे छिपी प्रज्ञा को तोड़ साथ ले जाते हैं,
सीमित अहम् की अन्धी दीवारों को बीच से तोड़ रास्ता बना लेते हैं,
तब एक महत्तर जीवन तक पहुंचने को यात्रा करते हैं।

All this streamed past her and seemed to her vision’s sight
As if around a high and voiceless isle
A clamour of waters from far unknown hills
Swallowed its narrow banks in crowding waves
And made a hungry world of white wild foam:
Hastening, a dragon with a million feet,
Its foam and cry a drunken giant’s din,
Tossing a mane of Darkness into God’s sky,
It ebbed receding into a distant roar.
Then smiled again a large and tranquil air:[494]
Blue heaven, green earth, partners of Beauty’s reign,
Lived as of old, companions in happiness;
And in the world’s heart laughed the joy of life.

यह सब सावित्री के पार्श्व से जलधारा सम बह गया और उसके
अन्तर्दर्शन में ऐसा दीखा जैसे एक ऊंचे निःशब्द टापू के चहुं ओर के,
सुदूर की अज्ञात पहाड़ियों से उतरते एक जलप्रपात के कोलाहल ने
इस टापू के संकीर्ण तटों को लहराती लहरों की रेलपेल में
निगल लिया था, और श्वेत झाग का एक भूखा जग रच दियाः
अपने लक्ष-लक्ष पांवों पर तीव्र गति से दौड़ता एक ड्रैगन था,
इसका झाग और चीत्कार एक मदमत्त दैत्य का शोर था,
यह प्रभु के आकाश में घोर अन्धकार की काली अयाल सम उछलता,
एक दूर दिशा की क्षीण होती पीछे हटती दहाड़ में डूब गया।
तब एक विशाल और शान्त वातावरण फिर मुस्करायाः
नीलाकाश, हरित धरती, चिर-सौन्दर्य राज्य के भागीदार,
प्रसन्नता में जीवन साथियों सम फिर से पहले जैसे रहने लगे;
और संसार का हृदय-जीवन हर्ष से युक्त हो हंसने लगा।

All now was still, the soil shone dry and pure.

अब सब स्थिर शान्त था, सूखी धरती विशुद्ध और दीप्तिमयी थी।

Through it all she moved not, plunged not in the vain waves
Out of the vastness of the silent self
Life’s clamour fled; her spirit was mute and free.

इस सबके मध्य सावित्री अचल रही, निरर्थक लहरों में निमग्न नहीं हुई,
उस नीरव चित्त की विशालता से वह बाहर नहीं आयी
प्राण-जीवन का कोलाहल थम गया; उसकी आत्मा मौन और मुक्त थी।

 

Then journeying forward through the self’s wide hush
She came into a brilliant ordered Space.

तब आत्मचेतना की नीरवता के विस्तार के मध्य यात्रा करती हुई
सावित्री एक प्रतिभाशाली व्यवस्थित आत्माकाश में आ पहुंची।

There Life dwelt parked in an armed tranquillity;
A chain was on her strong insurgent heart.

वहां पर प्राणशक्ति एक सुसज्जित प्रशान्ति में स्थित थी;
उसका अदमनीय शक्तिशाली हृदय एक श्रृंखला से बंधा था।

Tamed to the modesty of a measured pace,
She kept no more her vehement stride and rush;
She had lost the careless majesty of her muse
And the ample grandeur of her regal force;
Curbed were her mighty pomps, her splendid waste,
Sobered the revels of her bacchant play,
Cut down were her squanderings in desire’s bazaar,
Coerced her despot will, her fancy’s dance,
A cold stolidity bound the riot of sense.

विनम्रता की एक मर्यादित चाल के लिए उसे पालतू बना दिया गया था,
अब वह शक्ति अपनी प्रचण्ड चाल की तीव्र उतावली और नहीं रख पाती थी;
वह अपनी निश्चिंत प्रभुता और अपनी चिंताहीन स्थिति खो चुकी थी
और अपने शाही बल की प्रचुर शोभा वैभव भी गंवा चुकी थी,
उसके शक्तिशाली प्रदर्शनों पर नियन्त्रण था, उसकी शानदार बर्बादी मिट गयी,
उसके मदनोत्सव की रंगरेलियां अब मर्यादा में बंधी थीं,
कामना के बाजार में उसकी फिजूलखर्ची काट दी गयी,
उसकी निरंकुश इच्छा की, उसके मनमौजी नृत्य की,
उस विद्रोहिणी की बुद्धि अब एक शीतल भावनाहीन स्थिरता से बंधी थी।

Her spirit’s bounds they cast in rigid lines.
A royalty without freedom was her lot;
The sovereign throned obeyed her ministers:
Her servants mind and sense governed her house:
And guarding with a phalanx of armoured rules
The reason’s balanced reign, kept order and peace.

बंधन में बंधी एक साम्राज्ञी की उसकी नियति
सिंहासन पर आसीन होकर भी अपने मन्त्रियों की आज्ञाकारिणी थीः
उसके अनुचर मन और संवेदन उसके घर पर शासन करतेः
उसकी सत्ता की परिधियों को उन्होंने अनम्य रेखाओं में बांध दिया
और सुसज्जित नियमों की तालिका से उसकी सुरक्षा करते,
विवेक का सन्तुलित शासन था, जो व्यवस्था और शान्ति बनाये रखता।

Her will lived closed in adamant walls of law,
Coerced was her force by chains that feigned to adorn,
Imagination was prisoned in a fort,
Her wanton and licentious favourite;
Reality’s poise and reason’s symmetry
Were set in its place sentinelled by marshalled facts,
They gave to the soul for throne a bench of Law,
For kingdom a small world of rule and line:
The ages’ wisdom, shrivelled to scholiast lines,[495]
Shrank patterned into a copy-book device.

उसकी इच्छाशक्ति विधान की दृढ़ सीमाओं में बन्द जीवित रहती,
उसकी सामर्थ्य अलंकार सम दिखती जंजीरों से बंधी रहती,
उसके मनमानी व्यभिचार की प्रिय सहचरी
कल्पना जकड़ी एक दुर्ग में बंदिनी बन रहती;
यथार्थता के सन्तुलन और तर्क के समतोलन के क्रमबद्ध तथ्यों ने
उसके निवास स्थान पर उन्हें प्रहरी बना नियुक्त कर दिया,
उन्होंने आत्मा को शासन हेतु एक दैवी विधान का मंच प्रदान किया,
राज्य हित नियम और सीमा में बंधा एक छोटा संसार दे दियाः
इस तरह युगों की प्रज्ञा बौद्धिक रेखाओं में बन्द निस्तेज हो गयी,
एक प्रतिलिपि पुस्तक यंत्र का नमूना मात्र बन रह गयी।

The Spirit’s almighty freedom was not here:
A schoolman mind had captured life’s large space,
But chose to live in bare and paltry rooms
Parked off from the too vast dangerous universe,
Fearing to lose its soul in the infinite.

आत्मा की सामर्थ्यशाली मुक्ति अब यहां नहीं थीः
एक दार्शनिक मन ने जीवन के बृहदाकाश पर अधिकार कर लिया,
किन्तु नगण्य असज्जित और निम्न कक्षों में रहना वरण किया
अति विशाल संकटकारी विश्व से दूर हट गया था,
वह अपनी अन्तरात्मा को अनन्तता में खो देने से डरता था।

Even the Idea’s ample sweep was cut
Into a system, chained to fixed pillars of thought
Or rivetted to Matter’s solid ground:
Or else the soul was lost in its own heights:
Obeying the Ideal’s high-browed law
Thought based a throne on unsubstantial air
Disdaining earth’s flat triviality:
It barred reality out to live in its dreams.

यहां तक कि विभाव का विशाल फैलाव भी काटकर एक दर्शनशास्त्र में
ढाल दिया, विचार के स्थायी निश्चित स्तम्भों से बांध दिया
यह जड़तत्त्व की ठोस भूमि से कीलित कर दिया गयाः
अन्यथा यह अन्तरात्मा अपने आत्म-शिखरों में लोप हो जातीः
परम आदर्श के उन्नत-बौद्धिक विधान का अनुसरण कर
मानस के संकल्प ने सारहीन वायुमण्डल पर एक सिंहासन रख लिया
पृथ्वी के क्षुद्र धरातल की अवहेलना करः
इसने भौतिक यथार्थ को अपने सपनों में स्थान देने से इन्कार कर दिया।

Or all stepped into a systemed universe:
Life’s empire was a managed continent,
Its thoughts an army ranked and disciplined;
Uniformed they kept the logic of their fixed place
At the bidding of the trained centurion mind.

अर्थात् एक व्यवस्था से पूर्ण सृष्टि में सब चलतेः
यहां जीवन का साम्राज्य भी एक सुव्यवस्थित महाद्वीप था,
इसके विचारों की सेना क्रमबद्ध और अनुशासित थी;
ये सुसज्जित विचार अपनी दृढ़ता से तर्कबुद्धि को यथास्थान रखते
और यह सब कार्य प्रशिक्षित सेनानायक मन के कथनानुसार करते।

Or each stepped into its station like a star
Or marched through fixed and constellated heavens
Or kept its feudal rank among its peers
In the sky’s unchanging cosmic hierarchy.

या प्रत्येक अपनी स्थिति में एक आकाशीय तारे सम कदम धरता
या एक निश्चित और नक्षत्रीय गगनों के मध्य चलता रहता
अथवा एक नभ की अपरिवर्तनशील ब्रह्माण्डीय परम्परा में
अपने समकक्षों के मध्य अपना सामन्तीपद बनाये रखता।

Or like a highbred maiden with chaste eyes
Forbidden to walk unveiled the public ways,
She must in close secluded chambers move,
Her feeling in cloisters live or gardened paths.

या अभिजात्या और शुचि नेत्रोंवाली एक सुकन्या समान था
जिसे जनपथों पर घूंघटहीन विचरण का निषेध था,
वह बन्द एकाकी कक्षों में विचरण करती,
उसकी भावनाएं एकान्त में रहती या उद्यानों के मध्य स्थित रहतीं।

Life was consigned to a safe level path,
It dared not tempt the great and difficult heights
Or climb to be neighbour to a lonely star
Or skirt the danger of the precipice
Or tempt the foam-curled breakers’ perilous laugh,
Adventure’s lyrist, danger’s amateur,
Or into her chamber call some flaming god,
Or leave the world’s bounds and, where no limits are,
Meet with the heart’s passion the Adorable[496]
Or set the world ablaze with the inner Fire.

यह जीवनशक्ति एक सुरक्षित सपाट मार्ग पर चलती,
यह उन महान् और कठिन शिखरों पर चढ़ने को लालायित नहीं थी
या एक एकाकी तारे की ओर आरोहण कर उसके समीप पहुंच जाने का
या खतरनाक खड़ी चोटी की परिक्रमा करने का साहस न करती,
या झाग से कुण्डलित लहरों के विपत्तिकारी हास्य से आकर्षित न होती,
दुस्साहसी की वंशी पर रीझने की और संकट की शौकीन नहीं थी,
या अपने अन्तर कक्ष में किसी प्रज्वलित देव को आमन्त्रित नहीं करती,
अथवा संसार के बन्धनों को तज कर असीम में समाने का
अपने हृदय के प्रेमावेश के साथ परम आराध्य से मिलने का
या अन्तराग्नि से इस जगत् को प्रज्वलित करने का साहस नहीं कर पाती।

A chastened epithet in the prose of life,
She must fill with colour just her sanctioned space,
Not break out of the cabin of the idea
Nor trespass into rhythms too high or vast.

वह जीवन के गद्य में एक गुण-अलंकारहीन विशेषण थी,
वह केवल अनुमोदित विस्तार को ही रंगों से भर सकती थी,
जो निज विचार के कक्ष को तोड़ बाहर नहीं आती
या अति उन्नत या विशाल छन्दों में प्रवेश नहीं कर पाती।

Even when it soared into ideal air,
Thought’s flight lost not itself in heaven’s blue:
It drew upon the skies a patterned flower
Of disciplined beauty and harmonic light.

जब यह एक आदर्श वायुमण्डल में उडा़न भरती,
विचार की उड़ान में स्वयं को स्वर्गाकाश की नीलिमा में लोप नहीं होने देतीः
यह गगनों पर एक नमूने का पुष्प आंक देती
जो अनुशासी सौन्दर्य और समन्वय के प्रकाश से बनाया जाता।

A temperate vigilant spirit governed life:
Its acts were tools of the considering thought,
Too cold to take fire and set the world ablaze,
Or the careful reason’s diplomatic moves
Testing the means to a prefigured end,
Or at the highest pitch some calm Will’s plan
Or a strategy of some High Command within
To conquer the secret treasures of the gods
Or win for a masked king some glorious world,
Not a reflex of the spontaneous self,
An index of the being and its moods,
A winging of conscious spirit, a sacrament
Of life’s communion with the still Supreme
Or its pure movement on the Eternal’s road.

एक संयमी सतर्क चित्त इस प्राण पर शासन करताः
इसके कर्म अति सावधान मननशील विचार के उपकरण थे,
जो अग्निल होने और जग को प्रज्वलित करने को तापहीन थे,
या फिर सावधान तर्क-बुद्धि की राजनीतिक चालें थीं
जो पूर्वनिर्धारित अन्त को प्राप्त करने को साधनों का परीक्षण करती,
या सर्वोच्च शिखर पर किसी शान्त आत्म-संकल्प की योजना
या अन्तर में किसी परम-उच्चादेश की एक कूटनीति होती
जो देवताओं की गोपित निधि को जय करने की थी
या एक मुखौटे के पीछे छिपे राजा की इस भव्य संसार को जीत लेने की,
सहज स्फूर्ति से भरी आत्म-सत्ता का एक आभास भी
उस सत्ता की और इसके मनोभावों की एक तालिका में नहीं था,
सचेत आत्मा की एक फड़फड़ाहट तक नहीं थी,
स्थिर-शान्त परमात्मा के साथ जीवन के सम्पर्क का एक भी प्रतीक
या परम शाश्वत के पथ पर इसका पुनीत संचरण नहीं होता।

Or else for the body of some high Idea
A house was built with too close-fitting bricks;
Action and thought cemented made a wall
Of small ideals limiting the soul.

अन्यथा इस देह के किसी उच्च विभाव के लिए
अति पास-पास जुड़ी ईटों से एक भवन रच लिया था;
कर्म और विचार को जोड़कर उस जीव सत्ता को
सीमित करने को लघु आदेशों की एक दीवार बना ली थी।

Even meditation mused on a narrow seat;
And worship turned to an exclusive God,
To the Universal in a chapel prayed
Whose doors were shut against the universe:
Or kneeled to the bodiless Impersonal
A mind shut to the cry and fire of love:
A rational religion dried the heart.

यहां तक ध्यान समाधि के चिन्तन क्षेत्र की भी संकरी सीमा थी;
जो एक विशिष्ट देवता की पूजार्चना की ओर मुड़ी थी,
एक मन्दिर में विश्वेश्वर की पूजा होती
पर इसके द्वार इस विश्व हित बन्द रहतेः
या निराकारी व्यक्तित्वहीन परमब्रह्म के चरणों में झुका
एक मन था जो प्रेम की अग्नि या आवाहन हित बन्द रहताः
एक बौद्धिकता से पूरित धर्म ने हृदय को शुष्क कर दिया था।

It planned a smooth life’s acts with ethics’ rule
Or offered a cold and flameless sacrifice.[497]

इसने नैतिक नियम के साथ जीवन हित अबाध संचरण की योजना बनायी
या एक तापरहित ठण्डी ज्वालाहीन आहुति अर्पित की।

The sacred Book lay on its sanctified desk
Wrapped in interpretation’s silken strings:
A credo sealed up its spiritual sense.

इसका पावन धर्मग्रन्थ अपनी पवित्र पीठिका पर
व्याख्याकार के रेशमी सूत्रों में बंधा रखा थाः
एक पंथ ने अपने आध्यात्मिक बोध पर मुहर लगा इसे बांध दिया था।

 

Here was a quiet country of fixed mind,
Here life no more was all nor passion’s voice;
A cry of sense had sunk into a hush.

यहां पर स्थिर मन का एक शान्त प्रदेश था,
यहां प्राण अब सर्वेसर्वा नहीं रहा, आवेश मौन था;
संवेदन का चीत्कार नीरवता में डूब गया था।

Soul was not there nor spirit, but mind alone;
Mind claimed to be the spirit and the soul.

वहां जीव या आत्मा नहीं थी केवल एकाकी मन था;
मनोमय पुरुष स्वयं आत्मा और जीव होने का दावा करता।

The spirit saw itself as form of mind,
Lost itself in the glory of the thought,
A light that made invisible the sun.

आत्म-पुरुष स्वयं को मानस का ही आकार मानता,
और स्वयं को विचार-संकल्प की महिमा में खो देता,
यह एक ऐसी ज्योति थी जिसने आत्म-सूर्य को अगोचर कर दिया।

Into a firm and settled space she came
Where all was still and all things kept their place.

सावित्री अब एक स्थिर दृढ़ व्यवस्थित अन्तराकाश में पहुंच गयी
जहां सब निश्चल था और सब वस्तुएं अपने स्थान पर रखी थीं।

Each found what it had sought and knew its aim.

प्रत्येक सत्ता जो खोजती प्राप्त कर लेती और अपना लक्ष्य जानती थी।

All had a final last stability.((( Another version of this paragraph-beginning of twelve lines:
This narrowed life’s pedestrian thought and will
Debouched into a little continent space
Where soul was not nor spirit, and thinking mind
Laboured content with small finalities.
It seemed to it the top of being’s arc
And the last circle of the quest of life.
It was a paradise for thought’s crowned ease
Where nothing more was left to find or know,
A tabernacle of wise contented life.)))

सबके पास एक अन्तिम निश्चित स्थायित्व था।

There one stood forth who bore authority
On an important brow and held a rod;
Command was incarnate in his gesture and tone;
Tradition’s petrified wisdom carved his speech,
His sentences savoured the oracle.

वहीं पर एक सत्ता पूर्ण-प्रभुता के साथ खड़ी थी
एक महान् स्वामित्व का मस्तक लिए वह दण्ड धारण किये थी;
उसकी भंगिमा और वाणी में आदेश मूर्तिमान् था;
परम्परा की कुण्ठित प्रज्ञा ने उसकी वाचा को गढ़ा था,
उसके वाक्यों में भविष्यवाणी का आभास था।

“Traveller or pilgrim of the inner world,
Fortunate art thou to reach our brilliant air
Flaming with thought’s supreme finality.

‘‘अन्तर-जगत् की पर्यटक या तीर्थयात्री,
तू सौभाग्यशालिनी है हमारे उज्जवल वातावरण में आ पहुंची
यह क्षेत्र विचार की सर्वोत्तम चरमता से प्रज्ज्वलित है।

O aspirant to the perfect way of life,
Here find it; rest from search and live at peace.

ओ परिपूर्ण जीवन विधि की अभीप्सु,
यहां इसे सिद्ध कर ले; संधान को विश्राम दे और शान्ति से जीवन बिता।

Ours is the home of cosmic certainty.[498]

हमारा यह भुवन ब्रह्माण्डीय स्थायित्व का है।

Here is the truth, God’s harmony is here.

यहां इसे सिद्ध कर ले; संधान को विश्राम दे और शान्ति से जीवन बिता।

Register thy name in the book of the elite,
Admitted by the sanction of the few,
Adopt thy station of knowledge, thy post in mind,
Thy ticket of order draw in Life’s bureau
And praise thy fate that made thee one of ours.
All here, docketed and tied, the mind can know,
All schemed by law that God permits to life.

हमारा यह भुवन ब्रह्माण्डीय स्थायित्व का है।
यहां सत्य का अस्तित्व है, प्रभु की समन्वयता का सामञ्जस्य यहीं है।
निज नाम को तू श्रेष्ठ विशिष्ट-जनों की सूची में दर्ज करा ले,
जिसमें अति अल्प प्रवेश हित अनुमति पाते हैं,
ज्ञान के क्षेत्र में निज स्थान ग्रहण कर, मनीषियों में अपना पद सम्भाल ले,
वैश्व प्राण जीवन के विभाग में तेरी लॉटरी सुव्यवस्था की निकली है
अपने भाग्य की सराहना कर जिसने तुझे हम में से एक बना दिया है।

This is the end and there is no beyond.

सब यहां पर सूची में अंकित और बाध्य हैं, मानस को सब ज्ञान है,
ईश जीवन में जो प्रदान करता है सब विधान द्वारा आयोजित है।
बस यही अन्त है और इसके परे यहां और कुछ नहीं है।

Here is the safety of the ultimate wall,
Here is the clarity of the sword of Light,
Here is the victory of a single Truth,
Here burns the diamond of flawless bliss.

यहां इस चरम सीमा में ही सुरक्षा है,
पूर्ण-प्रकाश की तलवार की धार सम स्पष्टता यहीं पर है,
एक एकाकी परम सत्य की विजय भी यहां है,
निष्कलंक आनन्द का हीरा भी यहीं जाज्वल्यमान है।

A favourite of Heaven and Nature live.”

तू स्वर्गलोक और वैश्व प्रकृति की प्रियपात्र बन यहां निवास कर।’’

But to the too satisfied and confident sage
Savitri replied casting into his world
Sight’s deep release, the heart’s questioning inner voice.

किन्तु उस अति तुष्ट और आश्वस्त संत के जगत् को
सावित्री ने आत्म-दृष्टि की गहराई से बेध दिया
और हृदय की प्रश्न करती अन्तर वाणी से उसने उत्तर दिया।

For here the heart spoke not, only clear daylight
Of intellect reigned here, limiting, cold, precise.

क्योंकि यहां हृदय मौन था, केवल बुद्धि के धूप सम उजले प्रकाश का
यहां साम्राज्य था, जो सीमा में बद्ध, ठंडा और यथातथ्य था।

“Happy are they who in this chaos of things,
This coming and going of the feet of Time,
Can find the single Truth, the eternal Law:
Untouched they live by hope and doubt and fear.

‘‘बहुत सुखी हैं वो जो वस्तुओं की इस अस्त-व्यस्तता में
काल-चरणों के इस आवागमन की गति में,
एकाकी परम-सत्य को, शाश्वत विधान को प्राप्त कर सके हैं:
वे आशा औ’ शंका औ’ भय से अछूते बन रहते हैं।

Happy are men anchored on fixed belief
In this uncertain and ambiguous world,
Or who have planted in the heart’s rich soil
One small grain of spiritual certitude.

बहुत सुखी हैं वे जन जो निश्चित विश्वास से जुड़े
इस अनिश्चित और धूमिल संसार में रहते हैं,
या जिन्होंने इस हृदय की उर्वरा धरती पर रोप दिया है
आध्यात्मिक निश्चयता के एक लघु बीज को।

Happiest who stand on faith as on a rock.

सबसे सुखी हैं वे जो निज धर्मास्था पर चट्टान सम दृढ़ रहते हैं।

But I must pass leaving the ended search,
Truth’s rounded outcome firm, immutable
And this harmonic building of world-fact,
This ordered knowledge of apparent things.

किन्तु मुझे तो संधान के इस अन्तिम पड़ाव को छोड़ आगे बढ़ना है,
सत्य के इस दृढ़ वर्तुलाकार परिणाम से, जो अपरिवर्तनीय है
और संसारी तथ्य द्वारा निर्मित इस व्यवस्थित सृष्टि से,
व्यक्त पदार्थों के इस नियमित ज्ञान से आगे जाना है।

Here I can stay not, for I seek my soul.”

क्योंकि मैं अपनी आत्मा को खोजती हूं अतः यहां ठहर नहीं सकती।’’

None answered in that bright contented world,
Or only turned on their accustomed way
Astonished to hear questioning in that air[499]
Or thoughts that could still turn to the Beyond.

उस प्रतिभाशाली सन्तुष्ट जग में किसी ने उत्तर नहीं दिया,
और केवल अपने अभ्यस्त पथ पर मुड़ गये
उस वायुमण्डल में आपत्ति की ध्वनि सुन वे चकित थे
या ऐसे विचारों से जो अभी भी परात्परता की ओर मुड़ सकते थे।

But some murmured, passers-by from kindred spheres:
Each by his credo judged the thought she spoke.

किन्तु सजातीय स्तरों से आये पथिकों में से कुछ खुसफुसायेः
उसके कथित विचार को अपने मतानुसार प्रत्येक ने परखा।

“Who then is this who knows not that the soul
Is a least gland or a secretion’s fault
Disquieting the sane government of the mind,
Disordering the function of the brain,
Or a yearning lodged in Nature’s mortal house
Or dream whispered in man’s cave of hollow thought
Who would prolong his brief unhappy term
Or cling to living in a sea of death?”

‘‘अरे यह कौन है जो यह भी नहीं जानती कि चैत्यात्मा
एक लघुतम ग्रन्थि है या एक स्त्राव का दोष है
जो मन के स्वस्थ शासन में अशान्ति फैलाती है,
मस्तिष्क के कार्य-कलाप में अव्यवस्था ले आती है,
या विश्व-प्रकृति के नश्वर गेह में बसी एक लालसा है,
या मानव के खोखले विचार की कन्दरा में फुसफुसाया गया एक सपना है
यहां कौन अपनी क्षणिक दुःखपूर्ण अवधि को लम्बा करना चाहता है
या मृत्यु के सागर में कौन जीवन से चिपका रहना चाहता है?’’

But others, “Nay, it is her spirit she seeks.

पर तभी अन्य बोल उठे, ‘‘नहीं, नहीं, वह तो अपनी अन्तरात्मा को खोजती है।

A splendid shadow of the name of God,
A formless lustre from the Ideal’s realm,
The Spirit is the Holy Ghost of Mind;
But none has touched its limits or seen its face.

जो परमेश्वर का नाम धरे एक भव्य छाया है,
परा-आदर्श के लोक से आयी एक निराकारी प्रभा है,
यह परमात्मा विश्व-मानस का एक पावन प्रेत है;
किन्तु किसी ने उसके अंगों का स्पर्श या उसका मुखदर्शन नहीं किया है।

Each soul is the great Father’s crucified Son,
Mind is that soul’s one parent, its conscious cause,
The ground on which trembles a brief passing light,
Mind, sole creator of the apparent world.

प्रत्येक अन्तरात्मा उसी परम-पिता की सूली पर चढ़ा पुत्र है,
मानव-मन उस जीव का एक पिता है, इसका सचेत कारण है,
इस धरती पर जहां यह क्षणिक ज्योति अल्प समय को कांपती है,
मनःशक्ति, इस व्यापक संसार की एकमात्र रचयिता है।

All that is here is part of our own self;
Our minds have made the world in which we live.”

यहां पर जिस सबका अस्तित्व है वह हमारी अपनी मानस-सत्ता का भाग है;
इस संसार की जिसमें हम रहते हैं हमारे मनों ने सृष्टि की है।’’

Another with mystic and unsatisfied eyes
Who loved his slain belief and mourned its death:
“Is there one left who seeks for a Beyond?

एक अन्य जिसके नेत्रों में असन्तोष और रहस्य भरा था
जिसे अपनी निहत आस्था से प्रेम था और इसकी मौत से दुःखी थाः
‘‘ क्या अभी भी कोई है जो एक परात्परता का संधान कर रहा है?

Can still the path be found, opened the gate?”

क्या अभी भी मार्ग मिल सकता है, वह द्वार खुल सकता है?’’

 

So she fared on across her silent self.

इस प्रकार सावित्री अपने नीरव मानस को पार कर आगे बढ़ गयी।

To a road she came thronged with an ardent crowd
Who sped brilliant, fire-footed, sunlight-eyed,
Pressing to reach the world’s mysterious wall,
And pass through masked doorways into outer mind
Where the Light comes not nor the mystic voice,
Messengers from our subliminal greatnesses,
Guests from the cavern of the secret soul.

वह एक ऐसे मार्ग पर आ पहुंची जहां एक उत्साही भीड़ उमड़ रही थी,
जो अग्निल, प्रतिभाशाली चरणों के साथ, सूर्य-दीप्तितुल्य नेत्रों से दौड़ रही थी,
यह संसार की गुह्य दीवार तक पहुंचने को जोर लगा रही थी,
और आवृत द्वारों से निकल हमारे बाहरी मन में प्रवेश हित धक्का दे रही थी
जहां पर कोई दिव्य ज्योति या गुह्य वाचा नहीं आ पाती है,
ये हमारी अवचेतना की दिव्य महानताओं के सन्देशवाहक थे,
सावित्री की गोपित अन्तरात्मा की कन्दरा से आये अतिथि थे।

Into dim spiritual somnolence they break[500]
Or shed wide wonder on our waking self,
Ideas that haunt us with their radiant tread,
Dreams that are hints of unborn Reality,
Strange goddesses with deep-pooled magical eyes,
Strong wind-haired gods carrying harps of hope,
Great moon-hued visions gliding through gold air,
Aspiration’s sun-dream head and star-carved limbs,
Emotions making common hearts sublime.

ये हमारी धूमिल आध्यात्मिक सुषुप्ति में बलपूर्वक प्रवेश कर जाते हैं
या हमारे जाग्रत् चित्त पर विस्तृत चमत्कार बन छा जाते हैं,
ये विभाव हैं जो अपनी उज्ज्वल गति से हमारे पीछे पड़ जाते हैं,
सपने हैं जो अजात दिव्य यथार्थ की ओर संकेत करते हैं,
गहन-झील सम अद्भुत नेत्रों की वैचित्र्यमयी देवियां हैं,
हवा में लहराते केशों के बली देव हैं जो आशा की बीन धारण किये हैं,
शशि-शोभा के महान् अन्तर्दर्शन हैं जो स्वर्ण वायु में तैरते हैं,
अभीप्सा के सूर्य सम सपनाते शीश हैं और तारों से गठित अंग हैं,
सामान्य हृदयों को उदात्त करते उच्च भावावेश हैं।

And Savitri mingling in that glorious crowd,
Yearning to the spiritual light they bore,
Longed once to hasten like them to save God’s world;
But she reined back the high passion in her heart:
She knew that first she must discover her soul.

और सावित्री उस भव्य भीड़ में सम्मिलित हो गयी,
वे जिस आत्मिक ज्योति को धारण किये थे वह उसके लिए लालायित हो उठी,
एक बार उनकी तरह दौड़कर उसमें भी प्रभु के संसार की रक्षा करने की लालसा जागी;
किन्तु उसने अपने अन्तर के उच्चावेश की लगाम खींच ली;
वह जानती थी कि सर्वप्रथम उसे अपनी चैत्य सत्ता खोजनी है।

Only who save themselves can others save.

केवल वे जो स्वयं को बचा सकते हैं दूसरों की रक्षा कर सकते हैं।

In contrary sense she faced life’s riddling truth:
They carrying the light to suffering men
Hurried with eager feet to the outer world;
Her eyes were turned towards the eternal source.

उसने जीवन-समस्या के सत्य का विपरीत बोध का सामना कियाः
वे दुःखी मानव हित प्रकाश वहन कर ले जाते
उतावले चरणों से बहिस्संसार की ओर दौड़ रहे थे;
किंतु सावित्री के नेत्र तो उस शाश्वत चित्-उद़्गम पर लगे थे।

Outstretching her hands to stay the throng she cried:
“O happy company of luminous gods,
Reveal, who know, the road that I must tread,—
For surely that bright quarter is your home,—
To find the birthplace of the occult Fire
And the deep mansion of my secret soul.”

अपने हाथों को उठा वह भीड़ थामने हित चिल्लायीः
‘‘हे दीप्तिमान् देवों की प्रसन्न मण्डली, जो भी जानता हो,
कृपया उस मार्ग को मुझे बतायें जिस पर चलकर,
मैं अपनी गोपित अन्तरात्मा के गहन भवन तक पहुंच जाऊं,
गुह्य देवाग्नि का जन्म-स्थान मैं खोजती हूं,
मुझे निश्चय है कि वही उज्ज्वल धाम ही आपका घर है।’’

One answered pointing to a silence dim
On a remote extremity of sleep
In some far background of the inner world.

उनमें से एक ने अन्तर्जगत् की किसी सुदूर पृष्ठभूमि के
अति एकाकी निद्रा के अति छोर के
एक नीरव धूमिल तट की ओर इंगित कर उत्तर दिया।

“O Savitri, from thy hidden soul we come.

‘‘हे सावित्री तेरी आच्छादित आत्मा से निकल हम आते हैं।

We are the messengers, the occult gods
Who help men’s drab and heavy ignorant lives
To wake to beauty and the wonder of things
Touching them with glory and divinity;
In evil we light the deathless flame of good
And hold the torch of knowledge on ignorant roads;
We are thy will and all men’s will towards Light.

हम सन्देशवाहक हैं, गुह्य देवता हैं
हम मानव के बोझिल, नीरस अज्ञ जीवनों के सहायक हैं
हम वस्तुओं में छिपी सुषमा और आद्भुत्य जगाते हैं
उनका स्पर्श कर उनमें भव्यता और दिव्यता भर देते हैं,
पाप में शिव की अमर ज्योति प्रज्वलित करते हैं
अविद्या के मार्गों पर ज्ञान की मशाल उठाये रहते हैं;
परम ज्योति की ओर ले जाते हम तेरा और मानव का संकल्प हैं।

O human copy and disguise of God[501]
Who seekst the deity thou keepest hid
And livest by the Truth thou hast not known,
Follow the world’s winding highway to its source.

हे प्रभु की प्रतिकृति, उसी की छद्मवेशी मानवी
तू जिस देवता को छिपाये है उसी को खोजती फिरती है,
अरे उसी परम सत्य द्वारा तू जीवित है जिसे जानती तक नहीं है,
इसके स्त्रोत तक पहुंचने को संसार के घुमावदार राजपथों का अनुसरण करती जा।

There in the silence few have ever reached,
Thou shalt see the Fire burning on the bare stone
And the deep cavern of thy secret soul.”

उस नीरव शान्ति में जहां विरला ही पहुंच पाता है,
वहां जड़-नग्न पाषाण पर तू उस देवाग्नि को प्रज्वलित देखेगी
और वहीं अपनी गुह्य-अन्तरात्मा का गहन गर्भगृह पायेगी।’’

Then Savitri following the great winding road
Came where it dwindled into a narrow path
Trod only by rare wounded pilgrim-feet.

तब सावित्री उस महान् घुमावदार मार्ग का अनुसरण करती
आ पहुंची जहां यह एक संकरी पगडंडी में सिमट गया था,
और जिस पर केवल विरले आहत तीर्थयात्री के पदचिह्न थे।

A few bright forms emerged from unknown depths
And looked at her with calm immortal eyes.

अज्ञात गहनताओं से कुछ प्रतिभाशाली आकृतियां प्रकटीं
और उसकी ओर शान्त अमर नेत्रों से निहारा।

There was no sound to break the brooding hush;
One felt the silent nearness of the soul.[502]

उस ध्यानमग्न नीरवता को भंग करता कोई शब्द वहां नहीं था;
केवल आत्मा की मूक समीपता का अनुभव ही वहां होता था।

END OF CANTO THREE